अररिया-गलगलिया राष्ट्रीय रेल परियोजना सामान्य बारिश में ही प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अररिया कोर्ट के हृदयपुर वार्ड संख्या 7 स्थित बीआर-5 पुल के पास मिट्टी कटाव के कारण पटरी से महज दो हाथ दूर गहरे गड्ढे बन गए हैं। कैपलिंग में भी दरारें देखी गई हैं। ये महज एक साल पहले 4410 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई थी। दैनिक भास्कर में खबर चलने के बाद रेलवे विभाग ने मरम्मत का काम शुरू किया। हालांकि, जिस तरीके से यह काम किया गया, उससे स्थानीय लोगों का गुस्सा और भड़क गया है। आरोप है कि रेलवे कर्मियों ने गहरे रेन कट में सिर्फ झाड़ियों और मिट्टी भरकर खानापूर्ति की है। पार्षद ने ‘मरहम पट्टी’ पर जताया ऐतराज स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है। वार्ड संख्या सात के पार्षद श्याम कुमार मंडल ने रेलवे की इस ‘मरहम पट्टी’ पर सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस रूट पर रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। महज मिट्टी और झाड़ियां भरकर गड्ढों को ढक देना यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण के एक साल के भीतर ही कैपलिंग में दरारें आना और मिट्टी बहना घटिया निर्माण सामग्री और मिट्टी की खराब भराई को दिखाता है। तकनीकी जानकारों के अनुसार, तटबंध से मिट्टी बह जाने के कारण पटरियों के नीचे के ढांचे की भार सहने की क्षमता खत्म हो जाती है। लोग कर रहे ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग असमान दबाव और ट्रेन के कंपन से भविष्य में ट्रैक धंसने या बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने अररिया-गलगलिया रूट के सभी पुलों और एंबैंकमेंट का तत्काल स्वतंत्र ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग की है। निर्माण में लापरवाही बरतने वाले दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। झाड़ी-मिट्टी की जगह कंक्रीट और रोड़ी से एंबैंकमेंट का स्थायी निर्माण किया जाए। हालांकि रेल विभाग के अधिकारी स्थिति सामान्य बता रहे हैं। लेकिन बारिश के शुरुआती दौर में ही उभरी यह दरार और रेलवे के अस्थायी इंतजामों ने यात्रियों और स्थानीय लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। गड्ढो को रिफिलिंग से ठीक किया जाएगा इस मामले पर पूछे जाने पर जानकारी देते हुए अररिया-कटिहार रेलखंड के डीसीएम अनूप सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही एक्सपर्ट इंजीनियरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की है। जांच में कोई चिंताजनक स्थिति नहीं पाई गई है और पटरियों के अनसेफ होने की बात को सिरे से खारिज किया गया है। उन्होंने कहा कि जो छोटे-मोटे गड्ढे दिखे हैं, उन्हें रिफिलिंग प्रक्रिया के तहत ठीक कर दिया जाएगा। अररिया-गलगलिया राष्ट्रीय रेल परियोजना सामान्य बारिश में ही प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अररिया कोर्ट के हृदयपुर वार्ड संख्या 7 स्थित बीआर-5 पुल के पास मिट्टी कटाव के कारण पटरी से महज दो हाथ दूर गहरे गड्ढे बन गए हैं। कैपलिंग में भी दरारें देखी गई हैं। ये महज एक साल पहले 4410 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई थी। दैनिक भास्कर में खबर चलने के बाद रेलवे विभाग ने मरम्मत का काम शुरू किया। हालांकि, जिस तरीके से यह काम किया गया, उससे स्थानीय लोगों का गुस्सा और भड़क गया है। आरोप है कि रेलवे कर्मियों ने गहरे रेन कट में सिर्फ झाड़ियों और मिट्टी भरकर खानापूर्ति की है। पार्षद ने ‘मरहम पट्टी’ पर जताया ऐतराज स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है। वार्ड संख्या सात के पार्षद श्याम कुमार मंडल ने रेलवे की इस ‘मरहम पट्टी’ पर सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस रूट पर रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। महज मिट्टी और झाड़ियां भरकर गड्ढों को ढक देना यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण के एक साल के भीतर ही कैपलिंग में दरारें आना और मिट्टी बहना घटिया निर्माण सामग्री और मिट्टी की खराब भराई को दिखाता है। तकनीकी जानकारों के अनुसार, तटबंध से मिट्टी बह जाने के कारण पटरियों के नीचे के ढांचे की भार सहने की क्षमता खत्म हो जाती है। लोग कर रहे ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग असमान दबाव और ट्रेन के कंपन से भविष्य में ट्रैक धंसने या बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने अररिया-गलगलिया रूट के सभी पुलों और एंबैंकमेंट का तत्काल स्वतंत्र ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग की है। निर्माण में लापरवाही बरतने वाले दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। झाड़ी-मिट्टी की जगह कंक्रीट और रोड़ी से एंबैंकमेंट का स्थायी निर्माण किया जाए। हालांकि रेल विभाग के अधिकारी स्थिति सामान्य बता रहे हैं। लेकिन बारिश के शुरुआती दौर में ही उभरी यह दरार और रेलवे के अस्थायी इंतजामों ने यात्रियों और स्थानीय लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। गड्ढो को रिफिलिंग से ठीक किया जाएगा इस मामले पर पूछे जाने पर जानकारी देते हुए अररिया-कटिहार रेलखंड के डीसीएम अनूप सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही एक्सपर्ट इंजीनियरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की है। जांच में कोई चिंताजनक स्थिति नहीं पाई गई है और पटरियों के अनसेफ होने की बात को सिरे से खारिज किया गया है। उन्होंने कहा कि जो छोटे-मोटे गड्ढे दिखे हैं, उन्हें रिफिलिंग प्रक्रिया के तहत ठीक कर दिया जाएगा।

