राजीवनगर रोड नंबर 14 से प्राइवेट एनजीओ की सूचना पर 3 बच्चों का लेबर डिपार्टमेंट ने रेस्क्यू कर लिया। तीनों बच्चे एक साइकिल की दुकान पर मौजूद थे। रेस्क्यू टीम बच्चों को गाड़ी पर बैठाकर अपने साथ घर लेकर चली आई। इसके बाद अपना घर के पास परिजन और दुकानदार पहुंच गए। बच्चों के पिता भी आए। पिता ने पहले अपना घर की कर्मियों से और रेस्क्यू टीम से बच्चों को छोड़ने की रिक्वेस्ट की। तीनों बच्चे साइकिल बनाने के लिए दुकान गए थे पिता सूरज कुमार ने बताया कि स्कूल से आने के बाद मेरे तीनों बच्चे साइकिल बनाने के लिए दुकान गए थे। वहां खुद से रिंच पेचकस उठाकर अपनी साइकिल ठीक करने लगे। इसी बीच वहां पर टीम आ गई। मेरे बच्चों को अपने साथ लेकर निकलने लगी। मेरी मां सब्जी बेचकर आ रही थी। उसने बच्चों को गाड़ी पर जाते देखकर रोकने का प्रयास किया। लेकिन उन लोगों ने उस वक्त मेरे बच्चों को नहीं छोड़ा मेरी मां से अपना घर आने के लिए कहा। कहा कि मुझे रुपए की भी डिमांड की गई। लेकिन मैं देने में सक्षम नहीं था। इसके बाद यहां आने पर कहा गया कि अपने बच्चों को यहां पर रहने दीजिए। इसके बदले आपको रुपए मिलेंगे। कम से कम बड़ा बेटा को रहने दीजिए। मैं शर्त मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। तीनों बच्चों को छोड़ने पर 75,000 मिलने की कही बात पदाधिकारी की ओर से मुझे समझाया जा रहा था कि एक दिन तीनों बच्चों को छोड़िएगा तो 75000 मिलेंगे। एक बेटी को एक दिन के लिए छोड़िएगा तो ₹25000 मिलेंगे। वही जिस साइकिल दुकान से तीनों बच्चों को रेस्क्यू किया गया था उसे दुकानदार का आरोप है कि अक्सर NGO वाली मैडम तंग करती रहती हैं। आज भी उन्होंने तीनों बच्चों को पकड़ने के बाद छोड़ने के लिए रुपए मांग रही थी। लेकिन मैंने साफ-साफ कह दिया कि बच्चे मेरी दुकान पर काम नहीं कर रहे हैं तो फिर मैं क्यों आपको रुपए दूं। बहुत समझाने के बाद भी नहीं मानी, बच्चों को सीधे लेकर वहां से टीम निकल गई। अक्सर मेरी दुकान पर आती रहती हैं।मुफ्त में हवा भी ले लेती हैं। फिलहाल परिजनों के विरोध के बाद अपना घर से तीनों बच्चों को छोड़ दिया गया है। बच्चों को परिजन अपने साथ लेकर घर चले गए हैं। राजीवनगर रोड नंबर 14 से प्राइवेट एनजीओ की सूचना पर 3 बच्चों का लेबर डिपार्टमेंट ने रेस्क्यू कर लिया। तीनों बच्चे एक साइकिल की दुकान पर मौजूद थे। रेस्क्यू टीम बच्चों को गाड़ी पर बैठाकर अपने साथ घर लेकर चली आई। इसके बाद अपना घर के पास परिजन और दुकानदार पहुंच गए। बच्चों के पिता भी आए। पिता ने पहले अपना घर की कर्मियों से और रेस्क्यू टीम से बच्चों को छोड़ने की रिक्वेस्ट की। तीनों बच्चे साइकिल बनाने के लिए दुकान गए थे पिता सूरज कुमार ने बताया कि स्कूल से आने के बाद मेरे तीनों बच्चे साइकिल बनाने के लिए दुकान गए थे। वहां खुद से रिंच पेचकस उठाकर अपनी साइकिल ठीक करने लगे। इसी बीच वहां पर टीम आ गई। मेरे बच्चों को अपने साथ लेकर निकलने लगी। मेरी मां सब्जी बेचकर आ रही थी। उसने बच्चों को गाड़ी पर जाते देखकर रोकने का प्रयास किया। लेकिन उन लोगों ने उस वक्त मेरे बच्चों को नहीं छोड़ा मेरी मां से अपना घर आने के लिए कहा। कहा कि मुझे रुपए की भी डिमांड की गई। लेकिन मैं देने में सक्षम नहीं था। इसके बाद यहां आने पर कहा गया कि अपने बच्चों को यहां पर रहने दीजिए। इसके बदले आपको रुपए मिलेंगे। कम से कम बड़ा बेटा को रहने दीजिए। मैं शर्त मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। तीनों बच्चों को छोड़ने पर 75,000 मिलने की कही बात पदाधिकारी की ओर से मुझे समझाया जा रहा था कि एक दिन तीनों बच्चों को छोड़िएगा तो 75000 मिलेंगे। एक बेटी को एक दिन के लिए छोड़िएगा तो ₹25000 मिलेंगे। वही जिस साइकिल दुकान से तीनों बच्चों को रेस्क्यू किया गया था उसे दुकानदार का आरोप है कि अक्सर NGO वाली मैडम तंग करती रहती हैं। आज भी उन्होंने तीनों बच्चों को पकड़ने के बाद छोड़ने के लिए रुपए मांग रही थी। लेकिन मैंने साफ-साफ कह दिया कि बच्चे मेरी दुकान पर काम नहीं कर रहे हैं तो फिर मैं क्यों आपको रुपए दूं। बहुत समझाने के बाद भी नहीं मानी, बच्चों को सीधे लेकर वहां से टीम निकल गई। अक्सर मेरी दुकान पर आती रहती हैं।मुफ्त में हवा भी ले लेती हैं। फिलहाल परिजनों के विरोध के बाद अपना घर से तीनों बच्चों को छोड़ दिया गया है। बच्चों को परिजन अपने साथ लेकर घर चले गए हैं।


