बुलंदशहर के अनूपशहर में शिवभक्ति का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। खानपुर निवासी 20 वर्षीय मुकुल करीब 3 फीट से कुछ अधिक लंबाई होने के बावजूद 41 लीटर गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने अनूपशहर गंगा घाट से गंगाजल भरा और भारी कलश को कांवड़ में रखकर अपने गांव खानपुर के लिए रवाना हुए। कांवड़ का कलश उनकी अपनी कद-काठी से भी बड़ा नजर आ रहा है। इसके बावजूद मुकुल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। लगातार दूसरे साल अनूपशहर से उठा रहे कांवड़ मुकुल की यह यात्रा पहली बार नहीं है। वह लगातार दूसरे साल अनूपशहर गंगा घाट से गंगाजल लेकर पैदल अपने गांव के लिए रवाना हुए हैं। कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालु जब उन्हें बड़े कलश के साथ यात्रा करते देखते हैं तो ठहरकर उनकी भक्ति और हौसले को देखते नजर आते हैं। कई लोग मुकुल के साथ तस्वीरें भी ले रहे हैं। मुकुल के कंधों पर रखा कलश देखने में काफी भारी नजर आता है। उनकी कद-काठी की तुलना में कांवड़ का आकार कई गुना बड़ा है। इसके बावजूद वह बिना झिझक लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा के दौरान वह भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि आस्था के आगे शारीरिक सीमाएं मायने नहीं रखतीं। बोले- भोलेनाथ का नाम लेते ही आसान लगती है राह मुकुल का कहना है कि यह सब भगवान भोलेनाथ की कृपा और आशीर्वाद से संभव हो रहा है। कांवड़ का वजन भले ही अधिक महसूस हो, लेकिन भगवान आशुतोष का नाम लेते ही रास्ता आसान लगने लगता है। वह इसी आस्था के साथ अपने गांव पहुंचकर पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

