15 अक्टूबर से ₹2000 से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने की तैयारी के बीच मप्र में व्यापारियों का विरोध तेज हो गया है। इसका असर कितना बड़ा हो सकता है, इसका अंदाजा भोपाल-इंदौर के यूपीआई कारोबार से लगाया जा सकता है। अगस्त में दोनों शहरों में ₹17,963 करोड़ का यूपीआई लेन-देन हुआ। यानी हर घंटे औसतन करीब ₹24 करोड़ रुपए। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के मुताबिक प्रदेश में अगस्त में ₹63,628 करोड़ का यूपीआई लेन-देन हुआ। इसमें 28% रकम अकेले भोपाल-इंदौर की है। इंदौर के व्यापारी 23 सितंबर को ₹2000 से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेंगे। वहीं, 16 अक्टूबर से प्रदेशभर के पेट्रोल पंपों पर 2 हजार से अधिक का भुगतान कैश में ही करना होगा इंदौर टियर-2 शहरों में छठवें पर
टियर-2 शहरों में यूपीआई लेन-देन की रकम के हिसाब से जयपुर ₹22,328 करोड़ के साथ सबसे आगे है। सूरत में ₹16,869 करोड़, कोयंबटूर में ₹13,561 करोड़, गाजियाबाद में ₹12,378 करोड़ और लखनऊ में ₹12,263 करोड़ का लेन-देन हुआ। इंदौर छठे स्थान पर है। कम मार्जिन वाले पेट्रोल-डीजल, अनाज पर असर एनपीसीआई के राष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक यूपीआई की करीब 20% रकम ₹2000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान की है। भोपाल-इंदौर में हर माह ₹17,963 करोड़ के यूपीआई लेन-देन पर यही अनुपात मानें तो करीब ₹3,591 करोड़ एमडीआर के दायरे में आ सकते हैं। 0.4% की दर से करीब ₹14.4 करोड़ मासिक एमडीआर बनेगा। इसमें इंदौर के ₹2,265 करोड़ और भोपाल के ₹1,326 करोड़ के भुगतान का अनुमान है। इसका ज्यादा असर कम मार्जिन वाले पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल कारोबार पर पड़ सकता है।

