उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है। सोमवार को जलस्तर 111.780 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 22 सेंटीमीटर नीचे है। खतरे का निशान 113 मीटर है। पानी कम होने से प्रशासन और बाढ़ प्रभावित लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन तटीय इलाकों में मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। कई जगह जलभराव और कीचड़ के कारण लोगों का आवागमन प्रभावित है। पिछले सप्ताह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। इससे पश्चिमी गंगाघाट क्षेत्र के कई मोहल्लों और गांवों में बाढ़ की स्थिति बन गई थी। घरों के आसपास पानी भरने के कारण लोगों को आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था। अब जलस्तर घटने से पानी तेजी से कम हो रहा है। कर्बला और हुसैननगर में अभी भी जलभराव पश्चिमी गंगाघाट के कर्बला, गोताखोर, हुसैननगर, सैय्यद कंपाउंड, तेजीपुरवा और मनसाखेड़ा में कई जगह पानी अब भी भरा है। जलस्तर कम होने के बाद भी रास्तों पर कीचड़ जमा है। कुछ स्थानों पर पानी ज्यादा होने के कारण दोपहिया वाहनों का निकलना मुश्किल बना हुआ है। स्थानीय लोग जरूरत के काम के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांवों में संपर्क मार्गों पर पानी और कीचड़ ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गजियाखेड़ा, पीपरखेड़ा और गड़रियन पीपरखेड़ा समेत आसपास के गांवों में पानी कम होने से राहत मिली है। हालांकि, कई संपर्क मार्ग अभी जलमग्न हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी घटने के साथ रास्तों पर कीचड़ और गंदगी की समस्या बढ़ गई है, जिससे आवागमन में दिक्कत हो रही है। मालवीय नगर समेत कई इलाकों में घटा पानी मालवीय नगर, श्रीनगर और रविदास नगर समेत कई इलाकों में भी पहले की तुलना में पानी कम हुआ है। इससे लोगों को राहत मिली है। हालांकि, जलभराव वाले स्थानों पर सामान्य स्थिति लौटने में अभी समय लग सकता है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि गंगा का जलस्तर इसी तरह घटता रहा तो अगले कुछ दिनों में बाढ़ का असर काफी हद तक खत्म हो जाएगा।

