पंजाब सरकार और मुलाजिमों के बीच हुई मीटिंग के बाद साझा मुलाजिम फ्रंट के प्रधान सुखचैन सिंह खैहरा व सीएम भगवंत मान की एक-दूसरे को मिठाई खिलाने वाली फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। फोटो वायरल होते ही मुलाजिम फ्रंट के नेता कर्मचारियों के निशाने पर आ गए। कर्मचारी लगातार अपने ही नेताओं से तीखे सवाल करते रहे। इस पर सुखचैन सिंह खैहरा ने आज अपनी चुप्पी तोड़ी और सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। सुखचैन खैहरा ने कहा कि सरकार ने उन्हें एक सुनियोजित ‘ट्रैप’ (जाल) में फंसाया। सरकार के लोगों ने खुद लोई व लड्डू मंगवाए थे। सरकार ने उन्हें लड्डू व लोई के ट्रैप में फंसाकर उनके आंदोलन को खत्म करने की कोशिश की। सरकार ने लोई डालते और लड्डू खिलाते की फोटो कुछ ही सेकेंडों में फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिससे नेताओं के प्रति कर्मचारियों में नेगेटिव भाव आ गया। उन्होंने कहा कि अब सरकार के साथ होने वाली मीटिंगों में कर्मचारी नेता पानी तक नहीं पियेंगे। खैहरा ने कहा कि अब मीटिंग युवा साथी करेंगे और वो बाहर बैठकर संघर्ष की अगुवाई करेंगे और कोर्ट में मजबूती से केस लड़ेंगे। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, सीएम के खिलाफ ‘सचिवालय से सतौज’ (सेक्रेटेरिएट टू सतौज) वापसी वाली मुहिम पूरी मजबूती से जारी रहेगी। मुलाजिम नेता सुखचैन सिंह खैहरा ने कही ये अहम बातें, सिलसिलेवार जानिए… सरकार के नैरेटिव में फंसा सोशल मीडिया अभियान: खैहरा ने भारी मन से स्वीकार किया कि जिस तरह से सरकार ने यह फोटो वायरल की, उससे कर्मचारियों के बीच गलतफहमी फैल गई। उन्होंने कहा कि हमारा सोशल मीडिया कैंपेन एकदम टॉप पर चल रहा था और सरकार पूरी तरह दबाव में थी। लेकिन इस एक फोटो के वायरल होते ही माहौल नकारात्मक हो गया और कर्मचारी अपने ही नेताओं के खिलाफ बोलने लगे। सरकार जो चाहती थी, वही हुआ। शिखर पर पहुंचा आंदोलन एक झटके में जमीनी धरातल पर आ गिरा। 18 प्रतिशत डीए की लड़ाई अदालतों में जारी: 8 प्रतिशत डीए (DA) पर समझौता करने के आरोपों पर खैहरा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जो लोग भ्रम फैला रहे हैं कि हम 8% लेकर मान गए हैं, वे गलत हैं। बकाया 18% डीए और अन्य मांगों के लिए हमारी पूरी टीम ऊपरी अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ रही है। अगर हम भागने वाले होते तो अदालती चक्कर न काट रहे होते। संघर्ष से पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता। युवाओं को सौंपी कमान: सरकार के साथ 27 तारीख को बैठक रखी है। खैहरा ने कहा कि 17-7-2020 वाले पत्र को रद्द करवाने के लिए युवा साथी मनप्रीत सिंह, 15-1-15 की मांग के लिए युवा नेता साहिल शर्मा प्रतिनिधित्व करेंगे। पुरानी पेंशन योजना (OPS) के लिए तनवाड़ा साहिब को अधिकृत कर भेजा जाएगा। खैहरा ने कहा कि किसान आंदोलन की तर्ज पर हम वरिष्ठ नेता बैठकों के दौरान बाहर रहेंगे, लेकिन बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करेंगे क्योंकि वार्ता से ही समाधान का रास्ता निकलता है। सुशील शर्मा बोले- सरकार के नैरेटिव से बचें मोर्चे के युवा नेता सुशील शर्मा ने पंजाब के सभी कर्मचारियों से संयम और समझदारी बरतने की अपील की। शर्मा ने कहा कि सरकार ने मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा लेकर एक नैरेटिव सेट किया था, ताकि कर्मचारियों और उनके नेताओं के बीच अविश्वास की दीवार खड़ी की जा सके। कर्मचारियों को सरकार के इस जाल से बाहर निकलना होगा और आपसी मतभेदों को भुलाकर एक बार फिर से आंदोलन को उसी मुकाम पर ले जाना होगा जहां से सरकार बैकफुट पर आई थी।

