2 साल में आम जनमत पार्टी को 620Ccr का चंदा:बिहार BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं; भास्कर से कहा- मैं 2022 में इस्तीफा दे चुकी हूं

2 साल में आम जनमत पार्टी को 620Ccr का चंदा:बिहार BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं; भास्कर से कहा- मैं 2022 में इस्तीफा दे चुकी हूं

आम जनमत पार्टी को साल 2023-24 में 620 करोड़ का भारी भरकम चंदा भी मिला था। BBC के इस खुलासे के बाद अब ये पार्टी सुर्खियों में है। ये चंदा कांग्रेस पार्टी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। सैकड़ों करोड़ के चंदे वाली पार्टी होने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में आम जनमत पार्टी ने अपना केवल एक उम्मीदवार चुनाव में खड़ा किया था। बताया जा रहा है कि इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अनामिका पासवान के नाम का जिक्र है जो फिलहाल बीजेपी की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। पटना में उनसे जब बात की गई तो उन्होंने ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया.. हालांकि उन्होंने बताया कि 2022 में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा को बनाया गया। गौरव मिश्रा के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी को बिहार से गुजरात के अहमदाबाद शिफ्ट कर दिया गया। 2020 तक चंदा सिर्फ 20 हजार था
बिहार में साल 2020 को रजिस्टर्ड होने के बाद पार्टी को अगले दो साल सिर्फ 20 हजार तक ही चंदा मिला। फिर अचानक से 2022-23 में आम जनमत पार्टी ने 216 करोड़ का चंदा जमा कर लिया। चंदा मिलने का सिलसिला अगले 2 साल में बढता चला गया। साल 2023-24 में पार्टी का चंदा 620 करोड़ तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के ट्रेजरर धर्मेंद्र वैष्णव से जब चंदे के सिलसिले में जानकारी लेने के लिए बात की गई तो उन्होंने बताया कि पार्टी अभी एक्टिव नहीं है और सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं गौरव मिश्रा (वर्तमान अध्यक्ष) की ओर से कई बार कॉल करने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। इससे सवाल और गहराता है कि 620 करोड़ का चंदा जुटाने वाली पार्टी क्यों बंद हो गई। अब जानिए चंदा कहां से आता था
रिपोर्ट के अनुसार, आम जनमत पार्टी को मिला सैकड़ों करोड़ रुपए का चंदा टैक्स चोरी करने वाले एक संगठित नेटवर्क से आता था। जिसमें आईटी प्रोफेशनल्स और कारोबारियों ने टैक्स शून्य करने के लिए इसका उपयोग किया। इस पूरे फर्जीवाड़े को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के एक सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो मामूली कमीशन काटकर बाकी रकम नकद या हवाला के जरिए वापस लौटा देते थे। गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां और सैकड़ों करोड़ का चंदा
भारत में 2800 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां हैं, जिनमें 6 नेशनल पार्टियां हैं तो 67 क्षेत्रीय पार्टियां हैं। बाकी बची सारी पार्टियां रजिस्टर्ड अनरिकॉगनाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (RUPP) की श्रेणी में आती हैं, यानी जो रजिस्टर तो हुई थी लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली. 2023-24 में इन पार्टियों को 1700 करोड़ रुपयों का चंदा मिला था। अगर तुलना करें तो इन पार्टियों को मिलने वाला चंदा भाजपा को अगर छोड़ दें तो कांग्रेस, एनसीपी और आम आदमी पार्टी जैसी पांच नेशनल पार्टियों से भी ज्यादा था। आम जनमत पार्टी को साल 2023-24 में 620 करोड़ का भारी भरकम चंदा भी मिला था। BBC के इस खुलासे के बाद अब ये पार्टी सुर्खियों में है। ये चंदा कांग्रेस पार्टी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। सैकड़ों करोड़ के चंदे वाली पार्टी होने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में आम जनमत पार्टी ने अपना केवल एक उम्मीदवार चुनाव में खड़ा किया था। बताया जा रहा है कि इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अनामिका पासवान के नाम का जिक्र है जो फिलहाल बीजेपी की बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। पटना में उनसे जब बात की गई तो उन्होंने ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया.. हालांकि उन्होंने बताया कि 2022 में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा को बनाया गया। गौरव मिश्रा के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी को बिहार से गुजरात के अहमदाबाद शिफ्ट कर दिया गया। 2020 तक चंदा सिर्फ 20 हजार था
बिहार में साल 2020 को रजिस्टर्ड होने के बाद पार्टी को अगले दो साल सिर्फ 20 हजार तक ही चंदा मिला। फिर अचानक से 2022-23 में आम जनमत पार्टी ने 216 करोड़ का चंदा जमा कर लिया। चंदा मिलने का सिलसिला अगले 2 साल में बढता चला गया। साल 2023-24 में पार्टी का चंदा 620 करोड़ तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के ट्रेजरर धर्मेंद्र वैष्णव से जब चंदे के सिलसिले में जानकारी लेने के लिए बात की गई तो उन्होंने बताया कि पार्टी अभी एक्टिव नहीं है और सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं गौरव मिश्रा (वर्तमान अध्यक्ष) की ओर से कई बार कॉल करने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। इससे सवाल और गहराता है कि 620 करोड़ का चंदा जुटाने वाली पार्टी क्यों बंद हो गई। अब जानिए चंदा कहां से आता था
रिपोर्ट के अनुसार, आम जनमत पार्टी को मिला सैकड़ों करोड़ रुपए का चंदा टैक्स चोरी करने वाले एक संगठित नेटवर्क से आता था। जिसमें आईटी प्रोफेशनल्स और कारोबारियों ने टैक्स शून्य करने के लिए इसका उपयोग किया। इस पूरे फर्जीवाड़े को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के एक सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो मामूली कमीशन काटकर बाकी रकम नकद या हवाला के जरिए वापस लौटा देते थे। गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां और सैकड़ों करोड़ का चंदा
भारत में 2800 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां हैं, जिनमें 6 नेशनल पार्टियां हैं तो 67 क्षेत्रीय पार्टियां हैं। बाकी बची सारी पार्टियां रजिस्टर्ड अनरिकॉगनाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (RUPP) की श्रेणी में आती हैं, यानी जो रजिस्टर तो हुई थी लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली. 2023-24 में इन पार्टियों को 1700 करोड़ रुपयों का चंदा मिला था। अगर तुलना करें तो इन पार्टियों को मिलने वाला चंदा भाजपा को अगर छोड़ दें तो कांग्रेस, एनसीपी और आम आदमी पार्टी जैसी पांच नेशनल पार्टियों से भी ज्यादा था।  

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