1984 के पीड़ितों से सार्वजनिक माफी मांगें दीपेंद्र हुड्डा:सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर भाजपा नेता ने घेरा, बोले- पीड़ितों का दर्द कुरेदा

1984 के पीड़ितों से सार्वजनिक माफी मांगें दीपेंद्र हुड्डा:सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर भाजपा नेता ने घेरा, बोले- पीड़ितों का दर्द कुरेदा

रोहतक में भाजपा के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी शमशेर सिंह खरक ने कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा 1984 के सिख दंगों में दोषसिद्ध रहे दिवंगत सज्जन कुमार को सार्वजनिक रूप से रोल मॉडल बताने पर रोष जताया। साथ ही इस मामले में दीपेंद्र हुड्डा से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने व 1984 के पीड़ितों और सिख समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। शमशेर सिंह खरक ने कहा कि 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में अदालतों द्वारा सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने एक अन्य 1984 मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। रोल मॉडल कहने से पीड़ित परिवारों की भावना हुई आहत
शमशेर खरक ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को रोल मॉडल बताने वाला बयान स्वाभाविक रूप से उन परिवारों की भावनाओं को आहत करता है, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपने परिजनों को खोया और दशकों तक न्याय की प्रतीक्षा की। क्या कांग्रेस के लिए अदालत का फैसला और पीड़ित परिवारों की पीड़ा से अधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक संबंध व व्यक्तिगत प्रशंसा है? पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बयान
शमशेर खरक ने कहा कि 1984 की हिंसा के पीड़ितों ने न्याय के लिए वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में किसी दोषसिद्ध व्यक्ति को आदर्श या रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना, पीड़ित परिवारों की संवेदनाओं के प्रति गंभीर असंवेदनशीलता है। जिन लोगों ने उस भयावह दौर में अपने परिजनों को खोया, उनके दर्द को राजनीतिक बयानबाजी के जरिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए
शमशेर खरक ने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा का बयान उनका व्यक्तिगत विचार या कांग्रेस की आधिकारिक सोच, यह कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए। यदि यह कांग्रेस की आधिकारिक लाइन नहीं है, तो पार्टी को सार्वजनिक रूप से इससे दूरी बनानी चाहिए और दीपेंद्र हुड्डा को अपना बयान स्पष्ट करने के लिए कहना चाहिए। शमशेर खरक ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अदालत द्वारा दोषसिद्ध व्यक्ति का महिमामंडन किसी भी दल के लिए उचित नहीं हो सकता। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे न्यायपालिका के निर्णयों और पीड़ितों की संवेदनाओं का सम्मान करें।

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