भरतपुर। 1.47 लाख रुपए का चेक बाउंस होने के मामले में विशिष्ट न्यायाधीश, डकैती प्रभावित क्षेत्र गुंजन गोयल ने आरोपी गोपाल सिंह की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत से मिली एक साल के साधारण कारावास और 1.99 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा बरकरार रखी है। अर्थदंड जमा नहीं कराने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। परिवादी के अधिवक्ता शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि मामला रनवीर सिंह की ओर से गोपाल सिंह के खिलाफ दायर परिवाद से जुड़ा है। दोनों भवन निर्माण सामग्री सप्लाई का कारोबार करते थे। परिवाद के अनुसार गोपाल सिंह ने मई से दिसंबर 2016 के बीच 4.50 लाख रुपए उधार लिए थे। तकाजा करने पर उसने अपनी फर्म गुरु कृपा अर्थ मूवर्स के बैंक खाते का 9 अक्टूबर 2017 का 1.47 लाख रुपए का चेक दिया। परिवादी ने चेक 28 दिसंबर 2017 को बैंक में लगाया, लेकिन वह अनादरित हो गया। इसके बाद 27 जनवरी 2018 को कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान मांगा गया, लेकिन आरोपी ने न राशि चुकाई और न नोटिस का जवाब दिया। निचली अदालत ने 15 नवंबर 2025 को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत गोपाल सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि उसने केवल एक लाख रुपए उधार लिए थे और इसके बदले खाली चेक दिया था, जिसे बाद में 1.47 लाख रुपए भरकर पेश किया गया। उसने बताया कि उसके बेटे ने एक लाख रुपए परिवादी के खाते में जमा भी किए थे। हालांकि अदालत ने माना कि पूरी चेक राशि चुकाने का कोई स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर होने की बात उसके अपने बयानों से पुष्ट होती है। अदालत ने कहा कि आर्थिक एवं व्यावसायिक लेन-देन में चेक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कायम रहना जरूरी है। ऐसे मामलों में परिवीक्षा का लाभ देने से चेक प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने अनुपस्थित आरोपी को गिरफ्तारी वारंट से तलब कर सजा की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

