होशियारपुर तहसील परिसर में वसीका नवीसों (स्टाम्प वेंडरों/लाइसेंसधारियों) द्वारा लाइसेंस के गलत इस्तेमाल और बिना अनुमति के काम करने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली जांच महज एक खानापूर्ति बनकर रह गई है और नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछली जांच में उन लाइसेंसधारियों को क्लीन चिट दे दी गई, जो खुद काम न करके अपने लाइसेंस पर अन्य व्यक्तियों से काम करवा रहे थे या जिन्होंने अपने केबिन/काउंटर किराए पर दे रखे हैं, जो कि कानूनन पूरी तरह गलत है। इसके अलावा, यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ बाहरी/अनधिकृत लोग तहसील दफ्तर में सरकारी क्लर्कों की ड्यूटी तक निभा रहे हैं। जांच की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया गया है कि पिछली जांच के दौरान अधिकारी उन्हीं लाइसेंसधारियों के साथ घूम रहे थे, जिन पर दूसरों से काम कराने के आरोप हैं। इससे जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता कटघरे में आ गई है। मांग की जा रही है कि प्रशासन को सार्वजनिक करना चाहिए कि पिछली जांच में आखिर किन-किन बिंदुओं की पड़ताल की गई थी। एक लाइसेंस पर एक ही व्यक्ति का नियम, पत्नियों के नाम का खेल नियमों के अनुसार एक लाइसेंस पर केवल वही व्यक्ति काम कर सकता है जिसके नाम पर वह जारी हुआ है। लेकिन होशियारपुर तहसील में कई मामले ऐसे सामने आए हैं जहां लाइसेंस पत्नी के नाम पर जारी हैं और सारा काम पति संभाल रहे हैं। तहसीलदार बोले- निष्पक्ष जांच होगी इस पूरे मामले पर जब तहसीलदार से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

