भोपाल में आदिवासी छात्रों के आंदोलन के दौरान ‘जय जोहार’ संबोधन को लेकर कथित जातिसूचक टिप्पणी और गाली-गलौज के मामले में जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने शुक्रवार को धार में प्रदर्शन किया। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय से रैली निकाली और एसपी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई। तत्कालीन थाना प्रभारी पर लगाए आरोप जयस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर को भोपाल में गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले आदिवासी छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। इसी दौरान मिसरोद के तत्कालीन थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने कथित तौर पर ‘जय जोहार’ संबोधन को लेकर छात्रों के लिए जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया और गाली-गलौज की। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उपलब्ध वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि ‘जय जोहार’ आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान का प्रतीक है। इस संबोधन को लेकर कथित अपमान से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। 18 अक्टूबर को भोपाल में आंदोलन की चेतावनी जयस ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की लागू धाराओं में एफआईआर दर्ज करने, प्रभावी अभियोजन और जांच के बाद नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की मांग की। एसपी कार्यालय में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डाबर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जयस ने चेतावनी दी कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर 18 अक्टूबर को भोपाल में लोकतांत्रिक जनआक्रोश महाआंदोलन किया जाएगा। धार जिलाध्यक्ष सुनील डावर के नेतृत्व में भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर एफआईआर की मांग उठाई गई। संगठन ने कहा कि मामला आदिवासी समाज के मान-सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

