हिमाचल- 35 लाख बॉक्स सेब देश की मंडियों में हॉरवेस्ट:2025 की तुलना में 40% कम; कुदरत की मार, 1.50 करोड़ पेटी तक उत्पादन गिरेगा

हिमाचल- 35 लाख बॉक्स सेब देश की मंडियों में हॉरवेस्ट:2025 की तुलना में 40% कम; कुदरत की मार, 1.50 करोड़ पेटी तक उत्पादन गिरेगा

हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 40 से 50 फीसदी तक गिरने का अनुमान है। प्रदेश में साल 2025 में करीब 3.5 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। मगर इस बार कुदरत की मार की वजह से उत्पादन लगभग 2 करोड़ पेटी में सिमटने का अनुमान है। बागवानी विभाग के अनुसार, अब तक लगभग 35 लाख पेटी सेब ही देश की मंडियों में भेजा गया है, जबकि बीते साल 13 अगस्त तक 55 से 60 लाख पेटी सेब हॉरवेस्ट हो चुका था। डॉयरेक्टर हॉर्टिकल्चर सतीश शर्मा ने माना कि इस बार अभी तक 40 से 45 फीसदी फसल कम लग रही है। उत्पादन में बड़ी गिरावट से बागवानों को बड़े नुकसान की आशंका है, क्योंकि 6000 फीट से कम ऊंचाई वाले भागों में जिन बागवानों ने बीते साल 500 पेटी सेब बेचा था, इस बार उत्पादन 50 से 100 पेटी में सिमट गया है। अच्छे रेट से नुकसान की कुछ भरपाई हो रही बागवानों के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि अब तक सेब के अच्छे दाम बहुत मिले है। सीजन के शुरुआत में कुछ बागवानों का उम्दा क्वालिटी का सेब 5000-5500 रुपए प्रति बॉक्स (20 से 22 किलो) तक भी बिका है। इन दिनों राज्य के मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब तुड़ान शुरू हो गया है। मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निचले इलाकों की तुलना में थोड़ी ज्यादा फसल है। अभी भी 2500 से 3500 रुपए प्रति पेटी सेब बिक रहा है। फसल कम जरूर, पर रेट से भरपाई हो रही: लोकेंद्र रोहड़ू के बागवान लोकेंद्र बिष्ट के अनुसार, सेब का औसत भाव 2,000 से 2,500 रुपए प्रति पेटी के बीच मिल रहा है। अच्छी गुणवत्ता वाले सेब का भाव 3,000 से 3,500 रुपए प्रति पेटी तक पहुंच रहा है। उनका कहना है कि इस बार फसल काफी कम है, लेकिन अच्छे दाम कम उत्पादन से होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई कर रहे हैं। रिलायंस जैसी कंपनियां सेब खरीद रही मंडियों के साथ साथ प्राइवेट कंपनियां भी बागवानों से सीधे सेब खरीद रही हैं और अच्छे दाम दे रही हैं। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी और कुछ छोटी खरीद कंपनियां बागवानों को 130 से 145 रुपए प्रति किलो तक भाव दे रही हैं। इससे राज्य में दूसरे सीए स्टोर संचालकों पर भी अच्छे रेट का दबाव बना रहेगा। फिलहाल प्राइ‌ेट कंपनियां इसे स्टोर करने के बजाय सीधे ओपन बाजार में बेच रही हैं। आमतौर पर अडानी एग्री फ्रेश, देवभूमि जैसी कंपनियां बागवानों से सेब खरीदकर सीए स्टोर में रखती है और दिसंबर से मई-जून के बीच बाजार में बेचती है, लेकिन अभी प्राइवेट कंपनियां बागवानों से लिया सेब सीधे बाजार में उतार रही है।

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