हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने लैब में विकसित किए दिमाग के सेल्स, 7 साल तक फले-फूले

हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने लैब में विकसित किए दिमाग के सेल्स, 7 साल तक फले-फूले

हार्वर्ड के वैज्ञानिकों (Harvard Scientists) ने लैब में विकसित ‘मिनी-ब्रेन’ को रिकॉर्ड 7 साल (2,555 दिन) तक न सिर्फ ज़िंदा रखा, बल्कि उसकी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ को भी टिक-टिक चलाते रहे। इससे पहले ऑर्गेनोइड्स को अधिकतम 694 दिन ही जीवित रखा जा सका था। नई सफलता ने साबित कर दिया कि लैब में भी दिमाग के सेल्स सालों तक फल-फूल सकते हैं। प्रयोग पूरा होने पर नियमों के तहत इन्हें नष्ट ज़रूर कर दिया गया, पर इस ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ ने साबित कर दिया कि इंसानी दिमाग के विकास का रहस्य अब प्रयोगशाला की परखनली में लाइव देखा जा सकता है।

काली मिर्च के दाने जितना आकार

हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने लैब में दिमाग के जिन सेल्स को विकसित किया, उनका आकार काली मिर्च के ढाने जितना था। इन 3D ऑर्गेनोइड्स को स्टेम सेल्स की मदद से तैयार किया गया था। वैज्ञानिकों ने न्यूट्रिएंट लिक्विड में सुधार करके इन दिमागी सेल्स के प्राकृतिक संकेतों को बनाए रखा।

10 लाख न्यूरॉन्स की सक्रियता

सिर्फ कुछ मिलीमीटर के इस मिनी-ब्रेन के भीतर 10 लाख से ज़्यादा जीवित दिमागी सेल्स यानी न्यूरॉन्स 7 साल तक लगातार सक्रिय रहे। इस दौरान ये न्यूरॉन्स एक-दूसरे को इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजते रहे।

इंसानी बचपन की सटीक नकल

सबसे चकित करने वाली बात थी कि जब 5 साल पुराने दिमागी सेल्स को किसी नए और शुरुआती न्यूट्रिएंट वातावरण में रखा गया, तो उन्होंने शून्य से शुरुआत करने के उम्र के हिसाब से परिपक्व मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण जारी रखा। वैज्ञानिकों ने जब 6 महीने से 5 साल की उम्र के बीच इन ऑर्गेनोइड्स का विश्लेषण किया, तो पाया कि ये दिमागी सेल्स ठीक उसी क्रम में परिपक्व हो रही थे, जैसे मां के गर्भ से लेकर शुरुआती बचपन में दिमाग विकसित होता है।

चिकित्सा में मिलेगा फायदा

हार्वर्ड के वैज्ञानिकों के इस प्रयोग से चिकित्सा में फायदा मिलेगा। ऑटिज्म और स्किज़ोफ्रेनिया बचपन में दिमाग के किस मोड़ पर आकार लेती हैं, इसे अब लाइव देखा जा सकेगा। अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया में दिमाग के सेल्स उम्र के साथ कैसे नष्ट होते हैं, इसका सटीक कारण और दवाएं खोजने में गति आएगी।अब वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य 7 साल का इंतजार किए बिना, प्रयोगशाला में इस विकास चक्र को तेज़ी से री-क्रिएट करना है जिससे दवाओं का परीक्षण जल्दी हो सके।

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