सोनीपत की फैक्ट्री में 20 रुपए के नकली सिक्के बनाए:गिरोह ने 10 सितंबर को फैक्ट्री समेटी, पंजाब से यूपी तक था नेटवर्क

सोनीपत की फैक्ट्री में 20 रुपए के नकली सिक्के बनाए:गिरोह ने 10 सितंबर को फैक्ट्री समेटी, पंजाब से यूपी तक था नेटवर्क

सफेद इको स्पोर्ट कार का टूटा हुआ बोनट…अंदर तीन युवक…और सीटों के नीचे रखे प्लास्टिक के कट्टे। बाहर से कार सामान्य दिख रही थी, लेकिन पुलिस ने तलाशी ली तो कट्टों से 20 रुपए के सिक्कों से भरी पन्नियां निकलती चली गईं। कुल 6,400 सिक्के मिले, जिनकी कीमत 1.28 लाख रुपए है। सहारनपुर पुलिस की जांच में सामने आया कि ये सिक्के हरियाणा के सोनीपत स्थित राई इंडस्ट्रीज एरिया में चल रही फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे थे। गिरोह का नेटवर्क पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी यूपी तक फैला था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली में साथी पकड़ा गया तो फैक्ट्री समेट दी पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह मूलरूप से मोहाली का रहने वाला है। वह सोनीपत के राई इंडस्ट्रीज एरिया में करीब पांच महीने से नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री चला रहा था। 8 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने गिरोह के सदस्य पारस जैन को करीब एक लाख रुपए के नकली सिक्कों के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद गिरोह को आशंका हुई कि जांच सोनीपत की फैक्ट्री तक पहुंच सकती है। 10 सितंबर को उपकार ने फैक्ट्री समेटने का फैसला लिया। सामान हटाकर गिरोह के सदस्य नया ठिकाना तलाशने निकल पड़े। उपकार, हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष और अनुराग पाल उर्फ लंकेश सहारनपुर पहुंचे थे। सहारनपुर को नया ठिकाना बनाने की तैयारी जांच में सामने आया कि गिरोह ने सहारनपुर को इसलिए चुना था, क्योंकि यहां से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी की तरफ आसानी से आवाजाही हो सकती है। योजना थी कि नया ठिकाना तैयार कर दोबारा नकली सिक्कों का उत्पादन शुरू किया जाए। लेकिन ठिकाना तय करने से पहले ही पुलिस को उनकी गतिविधियों की जानकारी मिल गई। जुबली पार्क के पास कार ने खोला राज 12 सितंबर की रात पुलिस टीम गश्त कर रही थी। श्रीराम चौक के पास मुखबिर ने सूचना दी कि कुछ लोग 20 रुपए के नकली सिक्के बाजार में चला रहे हैं और सफेद इको स्पोर्ट कार में बैठे हैं। पुलिस टीम जुबली पार्क की तरफ पहुंची। करीब 80 मीटर दूर सफेद इको स्पोर्ट कार खड़ी दिखाई दी। कार का बोनट टूटा हुआ था। पुलिस ने कार को घेरकर तलाशी ली तो अंदर तीन लोग मिले। ड्राइवर सीट पर उपकार लूथरा, साइड सीट पर हिमांशु और पीछे कुलदीप बैठा था। कार में प्लास्टिक के कट्टों से 20 रुपए के सिक्कों की पन्नियां बरामद हुईं। 6,400 नकली सिक्के, 1.28 लाख रुपए कीमत उपकार के पास 25 पन्नियों में 2,500 सिक्के मिले। इनकी कीमत 50 हजार रुपए थी। कुलदीप के कपड़े के थैले से 14 पन्नियों में 1,400 सिक्के मिले, जिनकी कीमत 28 हजार रुपए थी। तीनों से कुल 6,400 नकली सिक्के बरामद हुए। इनकी कुल कीमत 1.28 लाख रुपए है। इसके अलावा उपकार से 6 हजार, हिमांशु से 2 हजार और कुलदीप से 2 हजार रुपए नकद मिले। यानी तीनों से 10 हजार रुपए नकद भी बरामद हुए। पांच डाई मिलीं, जिनसे तैयार होते थे सिक्के पुलिस को कार की पिछली सीट पर रखे पारदर्शी डिब्बे से पांच लोहे की डाई भी मिलीं। इनमें तीन डाई पर अशोक स्तंभ, INDIA और भारत लिखा था। एक डाई पर 20, आजादी का अमृत महोत्सव और 75th Year of Independence अंकित था। दूसरी डाई पर 20 रुपए और TWENTY RUPEES 2022 लिखा था। पुलिस के मुताबिक इससे साफ है कि गिरोह के पास नकली सिक्के तैयार करने के साथ उनकी डिजाइन तैयार करने की व्यवस्था भी थी। पुलिस ने बरामद सिक्कों के अलग-अलग पैकेट से एक-एक सिक्का निकालकर कुल 64 सिक्के नमूने के तौर पर सुरक्षित किए हैं। दिल्ली से कच्चा माल, सोनीपत में तैयार होते थे सिक्के जांच में सामने आया कि नकली सिक्के तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल दिल्ली से लाया जाता था। इसे लाने की जिम्मेदारी हिमांशु और संतोष को दी गई थी। इसके लिए गिरोह की गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था। यानी गिरोह ने पूरा काम अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। दिल्ली से कच्चा माल आता था, सोनीपत की फैक्ट्री में सिक्के तैयार होते थे और इसके बाद नेटवर्क से जुड़े लोग इन्हें अलग-अलग राज्यों के बाजारों में खपाते थे। पंजाब से लेकर बिहार तक जुड़ी कड़ियां मुख्य आरोपी उपकार लूथरा मोहाली का रहने वाला है। सोनीपत में उसने फैक्ट्री स्थापित की थी। सहारनपुर के तीतरों क्षेत्र का हिमांशु और मुजफ्फरनगर का कुलदीप उसके साथ गिरफ्तार हुए हैं। जांच में बिहार का कनेक्शन भी सामने आया है। गिरोह का सदस्य संतोष बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है। पुलिस ने उसके भाई अखिलेश को भी मामले में नामजद किया है, जिसकी गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। इसके अलावा अनुराग पाल उर्फ लंकेश का नाम भी जांच में सामने आया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क किसी एक शहर तक सीमित नहीं था। बाजार में सिक्के खपाने के लिए अलग नेटवर्क पुलिस के मुताबिक गिरोह में सदस्यों की जिम्मेदारी अलग-अलग थी। कोई कच्चा माल लाता था, कोई फैक्ट्री में सिक्के तैयार करता था और कुछ लोग इन्हें बाजार में चलाने का काम करते थे। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि पांच महीने में गिरोह ने कितने नकली सिक्के तैयार किए और कितनी बड़ी रकम के सिक्के बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं। दिल्ली में पकड़े गए पारस जैन और सहारनपुर से बरामद 6,400 सिक्कों को भी जांच में जोड़ा जा रहा है। 8 मोबाइल से खुलेगी सप्लाई चेन तीनों आरोपियों से कुल आठ मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इनमें एंड्रॉयड और कीपैड फोन दोनों शामिल हैं। पुलिस इन मोबाइलों की जांच कर रही है। कॉल डिटेल और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि नकली सिक्कों की सप्लाई किन लोगों तक पहुंचती थी और नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे। सात-आठ लोगों का नेटवर्क, और गिरफ्तारी की तैयारी एसपी सिटी व्योम बिंदल के मुताबिक नकली सिक्के बनाकर बाजार में सप्लाई करने के मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। शुरुआती जांच में गिरोह में सात से आठ लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है। जांच आगे बढ़ने पर अन्य नाम भी सामने आने की उम्मीद है।

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