अजमेर नगर निगम में पार्षद चुनाव के रिजल्ट में भाजपा व कांग्रेस, दोनों ही पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में मेयर-डिप्टी मेयर अपनी पार्टी का बनाने के लिए दोनों ही दल निर्दलियों के समर्थन के भरोसे है। दोनों ही दल मेयर अपनी पार्टी से बनाने और निर्दलियों के समर्थन का दावा कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही पार्टी में फिलहाल मेयर पद का प्रत्याशी तय नहीं हो पाया है। दोनों ही पार्टी के पार्षद एक नाम पर एक राय नहीं होते दिख रहे। ऐसे में दोनों ही पार्टी की ओर से मेयर पद के प्रत्याशी का नाम आज रात तक फाइनल कर लिया जाएगा और कल ही नामांकन दाखिल किए जाएंगे। भाजपा का पिछला 36 साल का बोर्ड बनाने का रिकॉर्ड टूटा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा 37 सीट मिली। भाजपा -मेयर प्रत्याशी के लिए इन नामों पर विचार कांग्रेस -मेयर प्रत्याशी के लिए इन नामों पर विचार कुल 38 महिलाओं ने जीत हासिल की नगर निगम के 80 वार्ड पार्षदों में 38 महिलाओं ने जीत हासिल की है। इसमें भाजपा से 16, कांग्रेस से 18 व 4 निर्दलीय शामिल है। बता दें कि अजमेर का मेयर पद अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है। बाडे़बंदी में दोनों पार्टी के पार्षद भाजपा व कांग्रेस, दोनों ही पार्टी के पार्षद बाडे़ बंदी में है। फिलहाल ये सभी पुष्कर के रिसोर्ट में है। यहां दोनों ही पार्टी पार्षदों से मेयर व डिप्टी मेयर के नामों पर रायशुमारी कर रही है। दोनों ही पार्टी को निर्दलियों की जरूरत है और दोनों ही पार्टी जिलाध्यक्ष का दावा है कि उनके पास बहुमत के लिए पर्याप्त निर्दलीय है। दोनों का ही कहना है कि मेयर पद के प्रत्याशी का निर्णय पार्षदों की राय से प्रदेश स्तर पर होगा। बता दें कि चुनाव में 11 निर्दलीय जीत कर आए और दोनों ही पार्टी को बहुमत नहीं मिला। पढ़िए…80 पार्षदों की प्रोफाइल …….. पढें ये खबर भी…. अजमेर में दोनों MLAभाजपा से, लेकिन टूटा 36साल का रिकॉर्ड:पिछली बार से उत्तर में 2 सीट कम, वहीं दक्षिण में 14 सीटों का हुआ बड़ा नुकसान अजमेर शहर में दोनों भाजपा विधायकों वासुदेव देवनानी व अनीता भदेल के बावजूद भाजपा का 36 साल का रिकॉर्ड टूट गया। भाजपा न केवल बहुमत से दूर हुई, बल्कि पिछले चुनाव से तुलना करें तो दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। पिछली बार भाजपा की 48 सीटें थी, लेकिन इस बार केवल 32 सीटों पर सिमट गई। अजमेर उत्तर में पिछली बार 25 सीट थी और इस बार 23 सीट जीती। वहीं अजमेर दक्षिण में पिछली बार 23 सीट थी और इस बार केवल 9 ही सीट पर जीत दर्ज की, जो बड़ा नुकसान साबित हुआ। (पूरी खबर पढें) राजस्थान निकाय चुनाव

