सोनवर्षा राज नगर पंचायत में 4.44 लाख की अवैध वसूली:फेक अटेंडेंस और बहाली के नाम पर सफाईकर्मियों ने DM से शिकायत की

सोनवर्षा राज नगर पंचायत में 4.44 लाख की अवैध वसूली:फेक अटेंडेंस और बहाली के नाम पर सफाईकर्मियों ने DM से शिकायत की

सहरसा के सोनवर्षा राज नगर पंचायत में सफाईकर्मियों ने मुख्य पार्षद मनीष कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी और सफाई एजेंसी पर भ्रष्टाचार व अवैध वसूली का आरोप लगाया है। मंगलवार को सफाईकर्मी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी (डीएम) सहरसा को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी पिछले 8 दिनों से हड़ताल पर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में साफ-सफाई ठप है। जिलाधिकारी को दिए आवेदन में सफाईकर्मियों ने बताया कि नगर पंचायत में स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 84 कर्मियों से काम लिया जा रहा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मिलीभगत से कागजों पर ‘फर्जी’ कर्मियों के नाम जोड़े गए हैं। कुल 4,44,000 रुपये की अवैध वसूली का आरोप ये कर्मी कभी काम नहीं करते, लेकिन उनके नाम पर हर महीने सरकारी राशि निकाली जा रही है। आवेदन में मुख्य पार्षद मनीष कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि उनके नजदीकी सुपरवाइजर के जरिए 37 कर्मियों से नौकरी के नाम पर करीब 12,000 रुपये प्रति व्यक्ति वसूले गए। इस तरह कुल 4,44,000 रुपये की अवैध वसूली की गई। इन कर्मियों को पहले रोजाना मजदूरी पर नाला सफाई के काम पर लगाया गया था, यह कहकर कि डीएम का आदेश है। हालांकि, ढाई महीने बाद उन्हें बिना कोई कारण बताए काम से हटा दिया गया। ”पूरी राशि का आपस में बंटवारा” सफाईकर्मियों ने मुख्य पार्षद मनीष कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नवीन कुमार, सफाई एजेंसी ‘बख्तियारपुर ट्रेडर्स’ और प्रियरंजन पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कर्मियों को मिलने वाले सुरक्षा उपकरण जैसे झाड़ू, जूते, वर्दी, दस्ताने, मास्क, साबुन, हेलमेट, कुदाल और खंती सिर्फ कागजों पर बांटे जाते हैं। असल में कोई सामग्री नहीं दी जाती और इसकी पूरी राशि का आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। न समय पर वेतन, न पीएफ खाते में जमा हो रही राशि कर्मियों का कहना है कि उन्हें किसी भी महीने समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं, हर माह उनके मानदेय से ईपीएफ (EPF) की कटौती तो की जाती है, लेकिन वह राशि उनके भविष्य निधि खातों में जमा नहीं की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग लगातार हो रहे शोषण से तंग आकर सफाईकर्मियों ने पिछले 8 दिनों से काम ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है। कर्मियों ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सफाई एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदन सौंपने वालों में सफाईकर्मी रविकुमार, बीरेंद्र मल्लिक, मुरारी सिंह, जोजन मल्लिक, अमन कुमार, अमर कुमार, साजन कुमार, प्रकाश मल्लिक, संतोष कुमार, अमीर कुमार, मनोज मल्लिक, पंकज मल्लिक, जितेंद्र मल्लिक सहित दर्जनों कर्मी शामिल हैं। वहीं इस मामले में सोनवर्षा राज नगर पंचायत अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि, ‘जो आरोप लगाए जा रहे हैं वह बेबुनियाद है। सफाई कर्मियों की हड़ताल के बाबत बातचीत चल रही है।’ सोनवर्षा नगर पंचायत के EO नवीन कुमार ने बताया, ‘ऐसा कुछ नहीं है।’ सहरसा के सोनवर्षा राज नगर पंचायत में सफाईकर्मियों ने मुख्य पार्षद मनीष कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी और सफाई एजेंसी पर भ्रष्टाचार व अवैध वसूली का आरोप लगाया है। मंगलवार को सफाईकर्मी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी (डीएम) सहरसा को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी पिछले 8 दिनों से हड़ताल पर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में साफ-सफाई ठप है। जिलाधिकारी को दिए आवेदन में सफाईकर्मियों ने बताया कि नगर पंचायत में स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 84 कर्मियों से काम लिया जा रहा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मिलीभगत से कागजों पर ‘फर्जी’ कर्मियों के नाम जोड़े गए हैं। कुल 4,44,000 रुपये की अवैध वसूली का आरोप ये कर्मी कभी काम नहीं करते, लेकिन उनके नाम पर हर महीने सरकारी राशि निकाली जा रही है। आवेदन में मुख्य पार्षद मनीष कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि उनके नजदीकी सुपरवाइजर के जरिए 37 कर्मियों से नौकरी के नाम पर करीब 12,000 रुपये प्रति व्यक्ति वसूले गए। इस तरह कुल 4,44,000 रुपये की अवैध वसूली की गई। इन कर्मियों को पहले रोजाना मजदूरी पर नाला सफाई के काम पर लगाया गया था, यह कहकर कि डीएम का आदेश है। हालांकि, ढाई महीने बाद उन्हें बिना कोई कारण बताए काम से हटा दिया गया। ”पूरी राशि का आपस में बंटवारा” सफाईकर्मियों ने मुख्य पार्षद मनीष कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नवीन कुमार, सफाई एजेंसी ‘बख्तियारपुर ट्रेडर्स’ और प्रियरंजन पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कर्मियों को मिलने वाले सुरक्षा उपकरण जैसे झाड़ू, जूते, वर्दी, दस्ताने, मास्क, साबुन, हेलमेट, कुदाल और खंती सिर्फ कागजों पर बांटे जाते हैं। असल में कोई सामग्री नहीं दी जाती और इसकी पूरी राशि का आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। न समय पर वेतन, न पीएफ खाते में जमा हो रही राशि कर्मियों का कहना है कि उन्हें किसी भी महीने समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं, हर माह उनके मानदेय से ईपीएफ (EPF) की कटौती तो की जाती है, लेकिन वह राशि उनके भविष्य निधि खातों में जमा नहीं की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग लगातार हो रहे शोषण से तंग आकर सफाईकर्मियों ने पिछले 8 दिनों से काम ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है। कर्मियों ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सफाई एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदन सौंपने वालों में सफाईकर्मी रविकुमार, बीरेंद्र मल्लिक, मुरारी सिंह, जोजन मल्लिक, अमन कुमार, अमर कुमार, साजन कुमार, प्रकाश मल्लिक, संतोष कुमार, अमीर कुमार, मनोज मल्लिक, पंकज मल्लिक, जितेंद्र मल्लिक सहित दर्जनों कर्मी शामिल हैं। वहीं इस मामले में सोनवर्षा राज नगर पंचायत अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि, ‘जो आरोप लगाए जा रहे हैं वह बेबुनियाद है। सफाई कर्मियों की हड़ताल के बाबत बातचीत चल रही है।’ सोनवर्षा नगर पंचायत के EO नवीन कुमार ने बताया, ‘ऐसा कुछ नहीं है।’  

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