Social Media Viral Post: भारत में बच्चों को बचपन से ही सुबह जल्दी उठने की सीख दी जाती है। देर तक सोने पर आलसी और अनुशासनहीन होने का तमगा भी मिल जाता है। लेकिन क्या सुबह जल्दी उठना वाकई सफलता और मेहनत का पैमाना होना चाहिए? इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। गुरुग्राम के उद्यमी और Knot Dating के को-फाउंडर एवं CEO जसवीर सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस सोच को चुनौती दी है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के सुबह 9 बजे उठने से वह आलसी नहीं हो जाता। असली सवाल यह होना चाहिए कि उसने रात में कितनी नींद ली और उसकी नींद कितनी अच्छी रही।
सिंह ने लिखा कि अगर कोई बच्चा सुबह 9 बजे तक सो जाए तो उसे तुरंत आलसी, अनुशासनहीन या कम महत्वाकांक्षी मान लिया जाता है। लेकिन वही व्यक्ति अगर सिर्फ पांच घंटे सोकर सुबह 5 बजे उठ जाए तो लोग उसकी तारीफ करने लगते हैं। सवाल यह है कि सिर्फ सुबह 5 बजे उठने से उसने आखिर हासिल क्या किया? सिंह के मुताबिक, जल्दी उठना अपने आप में कोई उपलब्धि नहीं है। शरीर और दिमाग के लिए पर्याप्त नींद लेना ज्यादा जरूरी है।
बचपन से ही बना दी जाती है जल्दी उठने की आदत
सिंह का कहना है कि भारतीय परिवारों में नींद को लेकर ऐसी सोच बचपन से ही बनती है। उन्होंने अपने बचपन का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि उन्हें भी अक्सर “जो सोता है, वो खोता है” जैसी बातें सुनने को मिलती थीं। उन्होंने यह भी लिखा कि कई घरों में बच्चे को जगाने के लिए पर्दे खोल दिए जाते हैं, दरवाजे जोर से बंद किए जाते हैं और कमरे की लाइट जला दी जाती है। यानी बच्चे की नींद पूरी हुई या नहीं, इस पर ध्यान देने के बजाय किसी भी तरह उसे सुबह जल्दी उठाना जरूरी समझा जाता है।
सिंह का सवाल है कि आखिर हम सिर्फ यह क्यों देखते हैं कि कोई कितने बजे उठा? यह क्यों नहीं पूछा जाता कि वह कितने बजे सोया था? उसकी नींद पूरी हुई या नहीं? नींद की गुणवत्ता कैसी थी? उनके मुताबिक, परिवारों में बस एक ही बात पर जोर रहता है कि सुबह जल्दी उठना चाहिए।
नींद का असर सिर्फ आराम तक सीमित नहीं
सिंह ने अपनी पोस्ट में नींद के महत्व का भी जिक्र किया। पर्याप्त नींद का असर एकाग्रता, याददाश्त, मूड, शरीर की रिकवरी, मेटाबॉलिज्म और सामान्य सेहत पर पड़ता है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर की अपनी नींद की एक प्राकृतिक लय होती है। जब शरीर की नींद पूरी हो जाती है, तो व्यक्ति स्वाभाविक रूप से जागने लगता है। इसलिए सिर्फ दूसरों को प्रभावित करने के लिए नींद काटकर जल्दी उठना समझदारी नहीं है।
नींद को किसी अपराध की तरह देखना बंद हो
सिंह ने भारतीय घरों में बच्चों की नींद जानबूझकर खराब करने की आदत पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि लाखों बच्चे आज भी रोजाना इसी तरह जगाए जाते हैं और कई लोगों के बड़े होने के बाद भी यह सोच नहीं बदलती। सिंह ने आखिर में कहा कि भारतीय माता-पिता को नींद को किसी अपराध की तरह देखना बंद करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बंटी हुई दिखी लोगों की राय
सिंह की पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया। उनका कहना था कि समाज ने सुबह जल्दी उठने को जरूरत से ज्यादा महत्व दे दिया है। एक यूजर ने लिखा कि सिंह की बात सही है। शरीर की अपनी नींद की घड़ी होती है और पर्याप्त आराम मिलने के बाद व्यक्ति स्वाभाविक रूप से जागता है।
हालांकि, कुछ लोगों ने इस तर्क को अधूरा बताया। उनका कहना था कि सुबह जल्दी उठने के अपने फायदे भी हैं। सुबह का समय शांत होता है और इस दौरान लोग एक्सरसाइज, पढ़ाई, मेडिटेशन या जरूरी काम बिना ज्यादा शोर-शराबे और रुकावट के कर सकते हैं। एक यूजर ने कहा कि रात 1 बजे सोकर सुबह 5 बजे उठना निश्चित तौर पर अनुशासन नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि जल्दी उठने का कोई फायदा नहीं है। सेना के जवानों, गुरुकुल के विद्यार्थियों, साधु-संतों और खिलाड़ियों में सुबह जल्दी उठने की परंपरा के पीछे अपनी वजहें रही हैं। उस यूजर के मुताबिक, असली समस्या जल्दी उठने में नहीं, बल्कि जल्दी उठने के लिए नींद से समझौता करने में है।
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा रूटीन सही नहीं
इस तर्क पर जसवीर सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि हर इंसान की काम करने की क्षमता और दिनचर्या अलग होती है। अगर कोई व्यक्ति रात 2 बजे तक सबसे ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है और सुबह 10 बजे उठता है, तो इसमें अपने आप कुछ गलत नहीं है। जरूरी यह है कि उसे पर्याप्त नींद मिले और वह अपनी दिनचर्या उसी हिसाब से बनाए, जो उसके लिए काम करती है। सिंह ने यह भी कहा कि जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने वाला व्यक्ति भी असफल हो सकता है और देर से सोने और देर से उठने वाला भी। सफलता का सीधा संबंध सूरज के हिसाब से चलने वाली घड़ी से नहीं है।
मां बनने के बाद बदली एक महिला की सोच
हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने जल्दी उठने के पक्ष में अपना निजी अनुभव भी शेयर किया। एक महिला ने बताया कि पहले वह भी मानती थी कि किसी को जबरदस्ती सुबह जल्दी उठाना सही नहीं है। लेकिन मां बनने के बाद उसने जल्दी सोने और जल्दी उठने की दिनचर्या अपनाई। उसके मुताबिक, इससे उसे खुद में बदलाव महसूस हुआ। वह ज्यादा सक्रिय रहती हैं, ज्यादा काम पूरा कर पाती हैं और उनका दिन भी पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर और प्रोडक्टिव रहता है।

