आवासीय भवन में कमर्शियल एक्टिविटी और अवैध निर्माण को लेकर सु्प्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल नगर निगम ने सोमवार को पहली कार्रवाई की। दुकानदारों को नोटिस थमाने के साथ ही कोलार रोड स्थित नयापुरा में अवैध निर्माण पर जेसीबी चली। दुकान का अवैध हिस्सा तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान दोनों ओर से ट्रैफिक बंद किया गया। संचालक व कांग्रेसियों ने विरोध जताते हुए बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यति पर आरोप भी लगाए। हालांकि, जिलाध्यक्ष यति ने कहा कि न रुपए की मांग की गई, न ही कार्रवाई में मेरा कोई लेना-देना है। उन्होंने कहा कि कुछ महीनों पहले नकली जिलाध्यक्ष बनकर गोकुल डेयरी संचालक ने ललिता नगर में बेसमेंट में बनी पांच दुकानों के शेड व फ्लैक्स तुड़वाए थे। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसकी शिकायत कोलार थाने में भी की गई। पुलिस ने नकली जिलाध्यक्ष बनकर दुकानों के शेड तोड़ने की कार्रवाई कराने वालों को गिरफ्तार भी किया। जिसका मामला न्यायालय में भी चल रहा है। मेरा नाम लेकर मुझे बदनाम किया गया नगर निगम के अनुसार, ए-सेक्टर नयापुरा कोलार रोड स्थित आवासीय भूखंड क्रमांक-34/1 एवं 34/2 पर बिना अनुमति निर्धारित एफएआर से अधिक क्षेत्र में निर्मित दुकानों एवं मकान के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। जेसीबी एवं अन्य संसाधनों व श्रमिकों के माध्यम से हटाने की कार्रवाई हुई। कार्रवाई से पहले लाड़कुंवर मीणा, महेंद्र सिंह मीणा, गोकुल मीणा, राधेश्याम मीणा, वीरेंद्र कुमार मीणा को नोटिस भी थमाए गए थे। कांग्रेसियों ने कार्रवाई का विरोध जताया
कार्रवाई का कांग्रेसियों ने भी विरोध जताया। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, कोलार ब्लॉक अध्यक्ष राहुल सिंह राठौड़ आदि मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि गोकुल डेयरी का ऊपर का हिस्सा अवैध नहीं था। राठौड़ ने बताया कि बीजेपी के छुटभैए नेता 10 से 15 लाख रुपए की मांग कर रहे थे। रुपए नहीं दिए तो उन्होंने डेयरी का शेड तुड़वा दिया। नोटिस का जवाब नहीं मिला तो पहुंची टीम
निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने उक्त भवन स्वामी को अवैध निर्माण के संबंध में समय-समय पर पत्र जारी किए गए अवैध निर्माणकर्ता द्वारा उक्त पत्रों का कोई उत्तर न देने पर नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 302 (1) के तहत नोटिस जारी किए। जिसमें अवैध निर्माण को रोकने एवं भवन निर्माण अनुमति व स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया। इसके बाद अवैध निर्माणकर्ताओं को वांछित दस्तावेज एवं लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए पुनः पत्र प्रेषित कर सुनवाई का अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान अवैध निर्माणकर्ताओं ने सरपंच द्वारा अनुमोदित भवन अनुज्ञा मानचित्र की छायाप्रति प्रस्तुत की गई। जिसमें भवन निर्माण अनुमति क्रमांक एवं दिनांक का उल्लेख नहीं पाया गया। इसके साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा मध्यप्रदेष पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 तथा तत्संबंधी प्रचलित प्रावधानों के अंतर्गत भवन अनुज्ञा जारी किए जाने की विधि सम्मत कार्रवाई पूर्ण किए जाने संबंधी कोई अभिलेख एवं साक्ष्य अथवा वैधानिक प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किए गए, जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 एवं संषोधित 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत मान्य योग्य नहीं थे। रात तक तोड़ने का काम जारी
नगर निगम की टीम ने दोपहर में यह कार्रवाई की। हालांकि, दुकान संचालकों ने कार्रवाई को गलत और द्वेषता पूर्वक बताया। इसके बाद मलबा हटाने का काम रात 9 बजे तक जारी रहा।


