मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को सदर अस्पताल, सुपौल में सुरक्षित प्रसव को लेकर जीएनएम की कार्यशाला आयोजित की गई। जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि प्रसव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही जच्चा-बच्चा दोनों के लिए गंभीर हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात जीएनएम सुरक्षित प्रसव के निर्धारित प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन करें। गर्भवती की नियमित निगरानी, खतरे के संकेतों की समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बिहार में मिडवाइफरी कार्यक्रम 2019 से संचालित कार्यशाला के साथ सदर अस्पताल में मिडवाइफरी लेड केयर यूनिट (MLCU) का उद्घाटन भी डीएम ने किया। यहां कम जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रशिक्षित नर्स प्रैक्टिशनर इन मिडवाइफरी (NPM) की देखरेख में गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि में सुरक्षित एवं सम्मानजनक देखभाल मिलेगी। डीएम ने कहा कि इससे सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और मातृ-नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में मिडवाइफरी कार्यक्रम 2019 से संचालित है। मरीजों को 83 प्रकार की जांच की सुविधा राज्य में 4 स्टेट मिडवाइफरी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, 57 कार्यरत NPM और 98 प्रशिक्षु हैं। विभिन्न जिलों में 12 MLCU संचालित हैं। NPM का प्रशिक्षण 18 माह का होता है। कार्यक्रम में डीएम, सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा, उपाधीक्षक डॉ. नूतन वर्मा और जिला कार्यक्रम प्रबंधक बालकृष्ण चौधरी ने 9 नवनियुक्त ममता कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के स्पोक-हब मॉडल के तहत संचालित लैब का शुभारंभ किया गया। इससे जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को 83 प्रकार की जांच की सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम में Jhpiego, UNICEF और UNFPA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अस्पताल प्रबंधक अभिनव आनंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को सदर अस्पताल, सुपौल में सुरक्षित प्रसव को लेकर जीएनएम की कार्यशाला आयोजित की गई। जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि प्रसव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही जच्चा-बच्चा दोनों के लिए गंभीर हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात जीएनएम सुरक्षित प्रसव के निर्धारित प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन करें। गर्भवती की नियमित निगरानी, खतरे के संकेतों की समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बिहार में मिडवाइफरी कार्यक्रम 2019 से संचालित कार्यशाला के साथ सदर अस्पताल में मिडवाइफरी लेड केयर यूनिट (MLCU) का उद्घाटन भी डीएम ने किया। यहां कम जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रशिक्षित नर्स प्रैक्टिशनर इन मिडवाइफरी (NPM) की देखरेख में गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि में सुरक्षित एवं सम्मानजनक देखभाल मिलेगी। डीएम ने कहा कि इससे सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और मातृ-नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में मिडवाइफरी कार्यक्रम 2019 से संचालित है। मरीजों को 83 प्रकार की जांच की सुविधा राज्य में 4 स्टेट मिडवाइफरी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, 57 कार्यरत NPM और 98 प्रशिक्षु हैं। विभिन्न जिलों में 12 MLCU संचालित हैं। NPM का प्रशिक्षण 18 माह का होता है। कार्यक्रम में डीएम, सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा, उपाधीक्षक डॉ. नूतन वर्मा और जिला कार्यक्रम प्रबंधक बालकृष्ण चौधरी ने 9 नवनियुक्त ममता कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के स्पोक-हब मॉडल के तहत संचालित लैब का शुभारंभ किया गया। इससे जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को 83 प्रकार की जांच की सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम में Jhpiego, UNICEF और UNFPA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अस्पताल प्रबंधक अभिनव आनंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

