एकता विहार, रतन नगर रोड स्थित श्री सुप्तेश्वर (कल्कि) गणेश मंदिर में 12 दिवसीय गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री सुप्तेश्वर विकास समिति 14 सितंबर, सोमवार को भगवान श्री गणेश जन्मोत्सव के साथ धार्मिक आयोजनों की शुरुआत करेगी। इस दौरान अखंड रामायण पाठ, भजन संध्या, महाआरती, छप्पन भोग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रतियोगिताएं और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। उत्सव से पहले निकाली गई संध्या फेरी का नर्मदा सभा, शक्ति नगर समेत कई जगहों पर भव्य स्वागत हुआ। घोड़े पर सवार बप्पा, स्वरूप धरती में समाया मंदिर की प्रमुख विशेषता यहां स्थापित भगवान गणेश की शिला है, जिसे कल्कि स्वरूप माना जाता है। इसमें भगवान गणेश घोड़े पर सवार हैं। उनका केवल ऊपरी हिस्सा ही दर्शनीय है, जबकि बाकी स्वरूप धरती के भीतर समाया हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां लगातार 40 दिनों तक दर्शन और पूजन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर में हर तीन महीने में भगवान को 25 किलो सिंदूर चढ़ाया जाता है। साथ ही 32 मीटर की माला और 32 मीटर का वस्त्र पहनाया जाता है। सपने में मिला आदेश, 1989 से परंपरा जारी मंदिर के इतिहास के अनुसार, संस्थापक सुधा अविनाश राजे को भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया था। स्वप्न में बताए स्थान पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने 4 सितंबर 1989 को गीला सिंदूर लगाकर पूजन किया था। इसके बाद से यह परंपरा लगातार जारी है। 24 घंटे खुला मंदिर, सुबह-शाम होती आरती पुजारी हिमांशु तिवारी ने बताया कि मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। यहां प्रतिदिन सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे आरती होती है। इसके साथ अभिषेक, वस्त्र-फूल माला चढ़ाने, भजन-कीर्तन और प्रसादी भोग की व्यवस्था रहती है।

