तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए। रेवंत रेड्डी की अमेरिका की यात्रा रद्द करने को लेकर देश में सियासी बवाल बढ़ गया है। इसको लेकर भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी ने भी प्रतिक्रिया दी है।
अरविंद धर्मपुरी ने कहा- रेवंत रेड्डी के साथ जाने वाला पूरा डेलिगेशन उन समझौतों पर आगे बढ़ रहा है जिन पर उन्हें साइन करना है। किसी ने उन्हें अमेरिका जाने से रोका नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री का जॉर्ज सोरोस से फंडेड ‘ब्लेवेंटिक स्कूल’ और जॉर्ज सोरोस से फंडेड दूसरे संस्थानों में जाना और वहां मीटिंग करना चिंता की बात है।
‘ वे भारत-विरोधी संस्थानों से मिल रहे थे’
भाजपा सांसद ने आगे कहा- मुझे नहीं पता कि मंज़ूरी क्यों नहीं मिली। लेकिन निश्चित रूप से, मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी उनके आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, वे देश-विरोधी और भारत-विरोधी संस्थानों से मिल रहे थे। ये संस्थान आर्टिकल 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को हटाने के खिलाफ हो रहे हंगामे को फंड कर रहे थे।
ब्रिटेन के बाद बोस्टन जाने वाले थे सीएम रेवंत
दरअसल, सीएम रेवंत को ब्रिटेन पहुंचने के बाद बोस्टन जाना था, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से साफ मना कर दिया गया। जिसकी वजह से वह हैदराबाद लौट गए। अब रेवंत रेड्डी की अमेरिकी यात्रा क्यों रद्द की गई, इसको लेकर विदेश मंत्रलय ने वजह बताई है।
एमईए ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साफ किया कि मुख्यमंत्रियों की विदेश यात्राओं के लिए कार्यक्रमों की जांच की जाती है। कार्यक्रम पद और यात्रा के मकसद के मुताबिक होने चाहिए। रेवंत रेड्डी को यूनाइटेड किंगडम जाने की मंज़ूरी दे दी गई थी। अमेरिका के मामले में, प्रस्तावित कार्यक्रम की समीक्षा विदेश मंत्रालय ने की और इसे उनके पद व यात्रा के मकसद के हिसाब से उचित नहीं माना। इसलिए, राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई।
तेलंगाना सरकार ने पहले मांगी थी अनुमति
तेलंगाना सरकार ने पहले ब्रिटेन और अमेरिका दोनों देशों की यात्रा के लिए केंद्र से अनुमति मांगी थी। प्रक्रिया पूरी की गई। शुरू में सिर्फ ब्रिटेन की मंजूरी मिली। प्रतिनिधिमंडल लंदन पहुंच गया। वहीं से अमेरिका जाने की तैयारी चल रही थी। तभी केंद्र ने बता दिया कि अमेरिका यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने तुरंत फैसला लिया और हैदराबाद लौट आए।
यात्रा का मकसद क्या था
रेवंत रेड्डी ने बताया कि यह दौरा तेलंगाना के विकास, शिक्षा को आगे बढ़ाने और विकसित भारत बनाने में मदद के लिए था। नई शिक्षा नीति के तहत दुनिया के बड़े संस्थानों को हैदराबाद और तेलंगाना से जोड़ना था।
उन्होंने बताया कि आइवी लीग विश्वविद्यालयों से जुड़ने पर राज्य के युवाओं को बेहतर पढ़ाई, स्किल और ट्रेनिंग के मौके मिल सकते थे। उन्होंने दौरा रद्द होने पर निराशा जताई। साथ ही कहा कि राष्ट्र निर्माण और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए।
केंद्र और राज्य की ओर से क्या कहा गया?
राज्य सरकार का आरोप है कि अनुमति राजनीतिक वजहों से रोकी गई। वहीं, केंद्र की तरफ से कहा जा रहा है कि सिर्फ कार्यक्रम सही नहीं थे। दोनों तरफ से अलग-अलग बातें सामने आई हैं।

