सावन का महीना समाप्त होते ही कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाला सुल्तानगंज अब धीरे-धीरे सूना होने लगा है। पूरे सावन महीने में जहां अजगैबीनाथ धाम और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा, वहीं अब कम श्रद्धालु नजर आ रहे हैं। भीड़ घटने के साथ ही बाजारों और कांवरिया मार्गों पर भी पहले जैसी रौनक नहीं रही। प्रशासन के मुताबिक इस बार एक महीने में करीब 75 लाख शिवभक्त सुल्तनागंज पहुंचे। उत्तर वाहिनी गंगा से जलकर लेकर देवघर रवाना हुए। स्थानीय सुनील पंडित ने बताया कि सावन के दौरान जिस इलाके में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए भी सीजन समाप्त होने के बाद कारोबार काफी कम हो गया है। गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की आवाजाही सीमित हो गई है। अनुमान के मुताबिक सावन के चरम दिनों की तुलना में अब श्रद्धालुओं की संख्या महज करीब दो प्रतिशत के आसपास रह गई है। सफाई अभियान की तैयारी सावन समाप्त होने के बाद अब प्रशासन और नगर निकाय की ओर से सुल्तानगंज में साफ-सफाई पर जोर दिया जा रहा है। लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने के कारण गंगा घाट, कांवरिया मार्ग और मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। ऐसे में अब मेला अवधि समाप्त होने के बाद घाटों और प्रमुख मार्गों की सफाई कराई जा रही है, अजगैबीनाथ धाम के आसपास भी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के बाद अस्थायी व्यवस्थाओं को भी धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पूरी तरह से बैरिकेडिंग हटाने की अनुमति नहीं इधर, गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को भी हटाने की प्रक्रिया जल संसाधन विभाग की ओर से शुरू की गई थी। सावन के दौरान गंगा के बढ़े जलस्तर और घाटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखने के लिए घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी। बैरिकेडिंग हटाने की जानकारी मिलने के बाद DM अलंकृता पांडेय ने फिलहाल इसे पूरी तरह हटाने की अनुमति नहीं दी। जिला अधिकारी ने निर्देश दिया कि गंगा में अभी खतरा बना हुआ है। भले ही श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हो गई हो, लेकिन जो श्रद्धालु भी गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डीएम ने निर्देश दिया कि जब तक गंगा में खतरे की स्थिति बनी हुई है, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग लगी रहेगी।
सावन में 24 घंटे रहती थी चहल-पहल सावन के दौरान सुल्तानगंज में दिन-रात श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती थी। गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान करने वालों की कतार लग जाती थी। इसके बाद श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर कांवर में गंगाजल लेकर देवघर की ओर रवाना होते थे। सड़कों पर बोल बम के जयकारे और कांवरियों की भीड़ से पूरा शहर भक्तिमय नजर आता था। अब वहीं सड़के काफी हद तक खाली नजर आ रही हैं। घाटों पर भी पहले जैसी भीड़ नहीं है। दुकानदारों के चेहरे पर भी सावन की चहल-पहल समाप्त होने का असर दिखाई देने लगा है। कई अस्थायी दुकानें और कांवरिया सेवा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी अब हटाई जा रही हैं। सावन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने वाला सुल्तानगंज अब एक बार फिर अपनी सामान्य दिनचर्या की ओर लौट रहा है। सावन का महीना समाप्त होते ही कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाला सुल्तानगंज अब धीरे-धीरे सूना होने लगा है। पूरे सावन महीने में जहां अजगैबीनाथ धाम और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा, वहीं अब कम श्रद्धालु नजर आ रहे हैं। भीड़ घटने के साथ ही बाजारों और कांवरिया मार्गों पर भी पहले जैसी रौनक नहीं रही। प्रशासन के मुताबिक इस बार एक महीने में करीब 75 लाख शिवभक्त सुल्तनागंज पहुंचे। उत्तर वाहिनी गंगा से जलकर लेकर देवघर रवाना हुए। स्थानीय सुनील पंडित ने बताया कि सावन के दौरान जिस इलाके में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए भी सीजन समाप्त होने के बाद कारोबार काफी कम हो गया है। गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की आवाजाही सीमित हो गई है। अनुमान के मुताबिक सावन के चरम दिनों की तुलना में अब श्रद्धालुओं की संख्या महज करीब दो प्रतिशत के आसपास रह गई है। सफाई अभियान की तैयारी सावन समाप्त होने के बाद अब प्रशासन और नगर निकाय की ओर से सुल्तानगंज में साफ-सफाई पर जोर दिया जा रहा है। लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने के कारण गंगा घाट, कांवरिया मार्ग और मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। ऐसे में अब मेला अवधि समाप्त होने के बाद घाटों और प्रमुख मार्गों की सफाई कराई जा रही है, अजगैबीनाथ धाम के आसपास भी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के बाद अस्थायी व्यवस्थाओं को भी धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पूरी तरह से बैरिकेडिंग हटाने की अनुमति नहीं इधर, गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को भी हटाने की प्रक्रिया जल संसाधन विभाग की ओर से शुरू की गई थी। सावन के दौरान गंगा के बढ़े जलस्तर और घाटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखने के लिए घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी। बैरिकेडिंग हटाने की जानकारी मिलने के बाद DM अलंकृता पांडेय ने फिलहाल इसे पूरी तरह हटाने की अनुमति नहीं दी। जिला अधिकारी ने निर्देश दिया कि गंगा में अभी खतरा बना हुआ है। भले ही श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हो गई हो, लेकिन जो श्रद्धालु भी गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डीएम ने निर्देश दिया कि जब तक गंगा में खतरे की स्थिति बनी हुई है, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग लगी रहेगी।
सावन में 24 घंटे रहती थी चहल-पहल सावन के दौरान सुल्तानगंज में दिन-रात श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती थी। गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान करने वालों की कतार लग जाती थी। इसके बाद श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर कांवर में गंगाजल लेकर देवघर की ओर रवाना होते थे। सड़कों पर बोल बम के जयकारे और कांवरियों की भीड़ से पूरा शहर भक्तिमय नजर आता था। अब वहीं सड़के काफी हद तक खाली नजर आ रही हैं। घाटों पर भी पहले जैसी भीड़ नहीं है। दुकानदारों के चेहरे पर भी सावन की चहल-पहल समाप्त होने का असर दिखाई देने लगा है। कई अस्थायी दुकानें और कांवरिया सेवा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी अब हटाई जा रही हैं। सावन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने वाला सुल्तानगंज अब एक बार फिर अपनी सामान्य दिनचर्या की ओर लौट रहा है।

