इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में बीएलएड डिग्री धारकों को भी शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव और निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा 11 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन को एनसीटीई एक्ट व 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के विपरीत मानते हुए रद्द कर दिया। महेश कुमार व 18 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने यह आदेश पारित किया। किन बिंदुओं पर जिरह जानिये याचिका पर अधिवक्ता का कहना था कि उ प्र शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज ने 11,508 पद असिस्टेंट टीचर अर्बन एरिया व 897 पद संबद्ध प्राइमरी स्कूल के लिए भर्ती निकाली। क्लॉज 7.1 में 2 वर्षीय डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन और 4 वर्षीय बी एल एड डिग्री को सिर्फ अर्बन एरिया के 11,508 पदों पर ही अनुमन्य किया है। 897 पदों वाले एडेड प्राइमरी स्कूलों से बाहर कर दिया गया है। नियमानुसार सहायक अध्यापक के लिए सीनियर सेकेंडरी 50 फीसदी + 4 वर्षीय बी एल एड एक वैध न्यूनतम अर्हता रखी गई है। वेतन एक समान तो अर्हता अलग क्यों याचिका में सवाल उठाया गया है कि दोनों तरह के स्कूलों में ड्यूटी और वेतन एक समान हैं तो फिर अर्हता अलग क्यों रखी गई है।अर्हता तय करने का अधिकार केंद्र की एन सी टी ई को है, चाहे स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद का हो या माध्यमिक का। हाईकोर्ट ने कहा 11.सितंबर .2026 के दोनों नोटिफिकेशन सेक्रेटरी माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज और डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (सेकेंडरी), लखनऊ द्वारा जारी किए गए हैं जो एक्ट और 23.अगस्त .2010 के नोटिफिकेशन के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए नोटिफिकेशन उस हद तक निरस्त किया जाय,जिस हद तक बी एल एड और डी एड विशेष शिक्षा को 897 पदों से बाहर किया गया। कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 5/2026 दिनांक 15.सितंबर .2026 में तुरंत सुधार जारी करने का आदेश दिया ताकि दो वर्षीय विशेष शिक्षा डिप्लोमा और चार वर्षीय बी एल एड वाले अभ्यर्थी भी 897 पदों पर आवेदन कर सकें। कोर्ट ने कहा याचियों सहित समान स्थिति वालों को आवेदन के लिए उचित अवसर दिया जाय। जरूरत के अनुसार अंतिम तिथि बढ़ाई जाए।

