पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे पूर्व और निवर्तमान सरपंचों के सामने इस बार गांव की राजनीति से पहले पुराने हिसाब-किताब की चुनौती खड़ी हो गई है। जिला परिषद की सूची में शामिल 37 सरपंचों पर करीब 1.48 करोड़ रुपए की बकाया राशि है। किसी पर हजारों रुपए बकाया हैं तो किसी के नाम लाखों रुपए की वसूली दर्ज है। इनमें दो पूर्व सरपंच ऐसे हैं, जिनसे ही एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि वसूल की जानी है। पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मी के बीच जिला परिषद ने इन बकाएदारों से वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन का साफ कहना है कि संबंधित प्रकरणों में बकाया राशि जमा कराने और नियमानुसार जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही एनओसी जारी की जाएगी। ऐसे में जिन उम्मीदवारों पर नियमानुसार बकाया होने के कारण एनओसी की जरूरत है, उनके लिए चुनाव से पहले अपना हिसाब दुरुस्त करना जरूरी होगा। उदयपुरवाटी सबसे आगे जिला परिषद की सूची में 8 पंचायत समितियों के जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें उदयपुरवाटी पंचायत समिति सबसे आगे है। यहां अकेले करीब 1.04 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है। खास बात यह है कि बकाया राशि का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा प्रकरणों में केंद्रित है। अब देखना होगा कि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ये जनप्रतिनिधि बकाया जमा कराते हैं या वसूली की कार्रवाई उनके लिए मुश्किल खड़ी करती है। दो पूर्व सरपंचों पर 1 करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया राशि के आंकड़ों में सबसे बड़े मामले उदयपुरवाटी पंचायत समिति के हैं। गुढ़ागौड़जी के पूर्व सरपंच रणवीर सिंह से 55.89 लाख रुपए और पौंख के पूर्व सरपंच मूलचंद सैनी से 44.88 लाख रुपए की वसूली प्रस्तावित है। दोनों मामलों की कुल राशि करीब 1.01 करोड़ रुपए बैठती है। यानी जिले के 37 जनप्रतिनिधियों पर दर्ज कुल बकाया का बड़ा हिस्सा इन दो प्रकरणों में ही शामिल है। इससे उदयपुरवाटी पंचायत समिति में वसूली की चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसी पंचायत समिति में धमोरा के पूर्व सरपंच श्रीपाल जाखड़ पर 3.48 लाख रुपए और सीथल की पूर्व सरपंच संजू चौधरी पर 2.77 लाख रुपए बकाया बताए गए हैं। इंद्रपुरा के पूर्व सरपंच रामधन जांगिड़ से 26,877 रुपए, छापोली की सरपंच ममता से 12,892 रुपए तथा नटास के पूर्व सरपंच शिवकुमार से ब्याज सहित 68,151 रुपए की वसूली होनी है।

