समस्तीपुर में पुलिस के खिलाफ अधिवक्ता आमरण अनशन पर बैठे:झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप, थानाध्यक्ष ने कहा- आरोप झूठे हैं

समस्तीपुर में पुलिस के खिलाफ अधिवक्ता आमरण अनशन पर बैठे:झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप, थानाध्यक्ष ने कहा- आरोप झूठे हैं

समस्तीपुर में विभूतिपुर थाना पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस पर झूठे मुकदमे में फंसाने और शिकायत के बावजूद निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता सोमवार को प्रखंड मुख्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। परिवाद पर प्राथमिकी के आदेश के बाद बढ़ा विवाद अनशन पर बैठे रंजीत कुमार के अनुसार, रोसड़ा व्यवहार न्यायालय में दाखिल एक परिवाद पर 6 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया था। उनका आरोप है कि इसके बाद थानाध्यक्ष ने व्यक्तिगत रंजिश के कारण उनके और परिवाद से जुड़े एक गवाह के खिलाफ कथित रूप से मनगढ़ंत घटना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करा दी। अधिवक्ता का दावा है कि जिस घटना को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज किया गया, उस समय मामले से जुड़े श्याम कुमार केशरी उर्फ फुलटुन सिंह नेपाल में एक शादी समारोह में मौजूद थे। उन्होंने इसके समर्थन में सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है। रंजीत कुमार ने एक अन्य प्राथमिकी को लेकर भी थानाध्यक्ष पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दोनों मामलों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य उन्होंने पुलिस के वरीय अधिकारियों को सौंपे, लेकिन इसके बावजूद उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। पटना हाईकोर्ट में भी दाखिल की रिट याचिका रंजीत कुमार ने बताया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर उन्होंने पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। उनके अनुसार, न्यायालय ने उन्हें 29 अक्टूबर 2026 को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और न्याय की मांग को लेकर है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनकी ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच ही नहीं होगी तो आखिर उन्हें न्याय कैसे मिलेगा। थानाध्यक्ष बोले- आरोप निराधार वहीं, विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा ने आरोपों को निराधार बताया है। थानाध्यक्ष का कहना है कि पुलिस ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई की है और किसी व्यक्ति को रंजिश के कारण फंसाने का आरोप सही नहीं है। समस्तीपुर में विभूतिपुर थाना पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस पर झूठे मुकदमे में फंसाने और शिकायत के बावजूद निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता सोमवार को प्रखंड मुख्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। परिवाद पर प्राथमिकी के आदेश के बाद बढ़ा विवाद अनशन पर बैठे रंजीत कुमार के अनुसार, रोसड़ा व्यवहार न्यायालय में दाखिल एक परिवाद पर 6 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया था। उनका आरोप है कि इसके बाद थानाध्यक्ष ने व्यक्तिगत रंजिश के कारण उनके और परिवाद से जुड़े एक गवाह के खिलाफ कथित रूप से मनगढ़ंत घटना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करा दी। अधिवक्ता का दावा है कि जिस घटना को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज किया गया, उस समय मामले से जुड़े श्याम कुमार केशरी उर्फ फुलटुन सिंह नेपाल में एक शादी समारोह में मौजूद थे। उन्होंने इसके समर्थन में सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है। रंजीत कुमार ने एक अन्य प्राथमिकी को लेकर भी थानाध्यक्ष पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दोनों मामलों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य उन्होंने पुलिस के वरीय अधिकारियों को सौंपे, लेकिन इसके बावजूद उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। पटना हाईकोर्ट में भी दाखिल की रिट याचिका रंजीत कुमार ने बताया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर उन्होंने पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। उनके अनुसार, न्यायालय ने उन्हें 29 अक्टूबर 2026 को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और न्याय की मांग को लेकर है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनकी ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच ही नहीं होगी तो आखिर उन्हें न्याय कैसे मिलेगा। थानाध्यक्ष बोले- आरोप निराधार वहीं, विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा ने आरोपों को निराधार बताया है। थानाध्यक्ष का कहना है कि पुलिस ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई की है और किसी व्यक्ति को रंजिश के कारण फंसाने का आरोप सही नहीं है।  

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