सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाने और उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की PM RAHAT (रोड एक्सिडेंट विक्टिम हॉस्पिटेलाइजेशन एंड एस्योर्ड ट्रीटमेंट) योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में शनिवार को योजना भवन, औरंगाबाद में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता एडिशनल कलेक्टर अनुग्रह नारायण सिंह ने की। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों के संचालकों ने भाग लिया। कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार सात दिनों तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। गोल्डन ऑवर में इलाज की आवश्यकता पर दिया जोर इससे आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा और समय पर उपचार मिलने से घायलों की जान बचाई जा सकेगी। उन्होंने विशेष रूप से गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय में उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। बताया कि इस दौरान घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी पात्र दुर्घटना पीड़ित का इलाज प्रभावित नहीं हो।
अस्पताल पहुंचते ही घायलों का शुरू होगा उपचार कार्यशाला में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। योजना का लाभ देने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान पुलिस पदाधिकारियों और जिले के सभी थानाध्यक्षों से कहा गया कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करें। दुर्घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी और निर्धारित प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर eDAR पोर्टल पर पूरा किया जाए, ताकि पीड़ित को योजना का लाभ मिलने में परेशानी नहीं हो। वहीं, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन को आपसी समन्वय के साथ दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। 10 सरकारी और 8 निजी अस्पतालों के संचालकों को जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश कार्यशाला में औरंगाबाद जिले के आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध सभी 18 अस्पतालों के संचालक शामिल हुए। इनमें 10 सरकारी और 8 निजी अस्पताल शामिल हैं। अस्पताल संचालकों को PM RAHAT योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस अवसर पर सिविल सर्जन, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, यातायात पुलिस उपाधीक्षक (ट्रैफिक डीएसपी), जिले के सभी थानाध्यक्ष, परिवहन विभाग के संबंधित पदाधिकारी और आयुष्मान योजना के नोडल पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला के अंत में सभी विभागों के अधिकारियों और अस्पताल संचालकों से योजना के शत-प्रतिशत प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई। जिला परिवहन कार्यालय ने आम नागरिकों से भी आग्रह किया कि सड़क दुर्घटना में घायल किसी व्यक्ति को देखकर मदद के लिए आगे आएं और उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें। समय पर मिलने वाला उपचार किसी की जिंदगी बचा सकता है। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाने और उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की PM RAHAT (रोड एक्सिडेंट विक्टिम हॉस्पिटेलाइजेशन एंड एस्योर्ड ट्रीटमेंट) योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में शनिवार को योजना भवन, औरंगाबाद में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता एडिशनल कलेक्टर अनुग्रह नारायण सिंह ने की। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों के संचालकों ने भाग लिया। कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार सात दिनों तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। गोल्डन ऑवर में इलाज की आवश्यकता पर दिया जोर इससे आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा और समय पर उपचार मिलने से घायलों की जान बचाई जा सकेगी। उन्होंने विशेष रूप से गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय में उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। बताया कि इस दौरान घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी पात्र दुर्घटना पीड़ित का इलाज प्रभावित नहीं हो।
अस्पताल पहुंचते ही घायलों का शुरू होगा उपचार कार्यशाला में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। योजना का लाभ देने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान पुलिस पदाधिकारियों और जिले के सभी थानाध्यक्षों से कहा गया कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करें। दुर्घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी और निर्धारित प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर eDAR पोर्टल पर पूरा किया जाए, ताकि पीड़ित को योजना का लाभ मिलने में परेशानी नहीं हो। वहीं, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन को आपसी समन्वय के साथ दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। 10 सरकारी और 8 निजी अस्पतालों के संचालकों को जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश कार्यशाला में औरंगाबाद जिले के आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध सभी 18 अस्पतालों के संचालक शामिल हुए। इनमें 10 सरकारी और 8 निजी अस्पताल शामिल हैं। अस्पताल संचालकों को PM RAHAT योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस अवसर पर सिविल सर्जन, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, यातायात पुलिस उपाधीक्षक (ट्रैफिक डीएसपी), जिले के सभी थानाध्यक्ष, परिवहन विभाग के संबंधित पदाधिकारी और आयुष्मान योजना के नोडल पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला के अंत में सभी विभागों के अधिकारियों और अस्पताल संचालकों से योजना के शत-प्रतिशत प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई। जिला परिवहन कार्यालय ने आम नागरिकों से भी आग्रह किया कि सड़क दुर्घटना में घायल किसी व्यक्ति को देखकर मदद के लिए आगे आएं और उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें। समय पर मिलने वाला उपचार किसी की जिंदगी बचा सकता है।

