इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली। आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी व अधिवक्ता शाश्वत आनंद मजबूत दलीलें दीं। एडवोकेट हाईकोर्ट शाश्वत आनंद ने बताया कि अब्दुल्ला पर आरोप है कि दो पैन कार्ड बना के इलेक्शन पेपर्स में उसका इस्तेमाल किया। हमने कोर्ट में दलील दी कि बर्थ सर्टिफिकेट वाले मैटर में ऑलरेडी कनविक्शन स्टेड (दोषसिद्धि पर रोक) है।
दूसरी बात कनविक्शन होना ही नहीं चाहिए क्योंकि कनविक्शन प्राइमाफेसी (प्रथम दृष्टया) अनसस्टेनेबल है। वकील ने कहा कि इन केसों में आरोपों के अलावा कोई एवीडेंस नहीं है जो ये साबित कर सके कि जिस तरह की क्रिमिनल की धारा लगाई गई। हमारी सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस एप्लीकेशन पर सजा निलंबित करके बेल दे दी गई है। सजा सस्पेंड, जमानत भी मंजूर
सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला की 10 साल की सजा को हाईकोर्ट ने गुरुवार को सस्पेंड कर दिया। दोनों को जमानत भी दे दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 पैन कार्ड मामले में यह फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आजम और उनका बेटा अब्दुल्ला रामपुर जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब्दुल्ला के जेल से बाहर निकलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, आजम अभी जेल से बाहर आएंगे या नहीं, यह साफ नहीं है। वजह, आजम के खिलाफ अभी 2 केस पेंडिंग हैं। आजम के खिलाफ एक मामला ईडी ने हाल ही में दर्ज किया है। दूसरा एक मामला 10 सितंबर का है, जिसमें यूपी विजिलेंस ने आजम के खिलाफ केस दर्ज किया था। अगर इन मामलों में पुलिस वारंट-बी नहीं लेती है, तो आजम जेल से बाहर आ सकते हैं। हालांकि, आजम जेल से बाहर आने के बाद भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, क्योंकि उन्हें रामपुर में अफसरों को तनखैय्या कहने के मामले में 2 साल की सजा है चुकी है। आजम खान नवंबर, 2025 में 2 पैन कार्ड मामले में सजा होने के बाद फिर से रामपुर जेल भेजे गए थे। क्या थी बचाव पक्ष की दलील? 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। वहीं, शिकायतकर्ता भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से अधिवक्ता शरद शर्मा और नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि दोषसिद्धि और सजा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। वहीं, यूपी सरकार ने दोनों की सजा सस्पेंड करने की मांग का विरोध किया था। सरकार ने अपनी याचिका में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की थी। 23 मई को आजम को 10 साल की सजा दी गई थी आजम को बेटे अब्दुल्ला के 2 पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी ठहराया था। 17 नवंबर, 2025 को कोर्ट ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी। 5 मई, 2026 को सरकार के वकील ने सजा बढ़ाने के लिए रामपुर की अपर कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इसके बाद कोर्ट ने 23 मई, 2026 को आजम की सजा को 3 साल बढ़ाकर 10 साल कर दिया था। अब्दुल्ला की सजा को कोर्ट ने नहीं बढ़ाया था। ये वही बर्थ सर्टिफिकेट हैं, जिनके आधार पर आजम ने बेटे अब्दुल्ला के 2 फर्जी पैन कार्ड बनवाए थे। क्या है 2 पैन कार्ड का मामला? 2019 में दर्ज हुआ था मुकदमा इस मामले की शुरुआत साल 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। साल- 2017 में बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने भी इस बारे में शिकायत की थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथि वाले 2 पैन कार्ड थे। एक पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी, 1993 और दूसरे में 30 सितंबर, 1990 दर्ज थी। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया गया। अब जानिए आजम के खिलाफ पेंडिंग 2 मामलों के बारे में पहला मामला- ईडी ने 14 अक्टूबर को जौहर ट्रस्ट और मो. अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज कराई थी। यह एफआईआर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुई थी। ईडी को शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले पैसों के सोर्स और उनके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई है। ईडी पता लगा रही है कि ट्रस्ट को पैसा कहां से मिला? उसे किन कामों में खर्च किया गया? सरकारी ठेकेदारों से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। दूसरा मामला- यूपी राज्य हज समिति की जमीन की बिक्री में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ी से जुड़ा है। विजिलेंस की जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में आजम खान समेत कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तत्कालीन सचिव एखलाक अहमद, डॉ. एमएए खान, आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मोहम्मद अय्यूब और मुस्तकीम अहमद शामिल हैं। यह केस 10 सितंबर, 2026 को यूपी विजलेंस के लखनऊ सेक्टर में दर्ज किया गया था। क्या होता है वारंट बी? कोई आरोपी, जो जेल में बंद हो और किसी दूसरे मामले में भी वांछित हो, तो उसे उस मामले में कोर्ट के सामने पेश करने के लिए वारंट- बी तामील कराया जाता है। दरअसल, आजम खान पहले से ही 2 पैनकार्ड मामले में जेल में बंद हैं। इस बीच रामपुर और लखनऊ में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हो गए। विजिलेंस और पुलिस आजम को अपने केस में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करना चाहती है। इसके लिए रामपुर जेल प्रशासन को वारंट-B तामील कराकर ही आजम को नए मामले में भी हिरासत में ले सकती है। हाईकोर्ट में आजम की पैरवी अभिषेक वकील मनु सिंघवी ने की हाईकोर्ट में 2 पैन कार्ड मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे। लेकिन, पिछले दिनों आजम खान ने अपना वकील बदल लिया था। गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस की। रामपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सतनाम सिंह मट्टू लोगों को लड्डू खिलाते हुए। वहीं, आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को जमानत मिलने के फैसले के बाद रामपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और आजम के करीबी सतनाम सिंह मट्टू ने लड्डू बांटे। आजम के वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को 2 पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। क्या आजम खान बाहर आ पाएंगे? सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शारिक अब्बासी कहते हैं- आजम खान को भले ही जमानत मिल गई हो, लेकिन जेल से बाहर तभी आ पाएंगे, जब पुलिस नए मामलों में उन्हें हिरासत में न ले। पुलिस के पास लखनऊ और रामपुर में पीसी एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) के तहत दर्ज मामलों में बी-वारंट हासिल करने का ऑप्शन है। अगर पुलिस वारंट नहीं ले पाती, तभी आजम जेल से बाहर आ सकेंगे।

