Sanjay Dutt Peace Statement Controversy: संजय दत्त के एक बयान ने देश में शांति और सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हाल ही में धुरंधर फेम एक्टर ने कहा था कि उन्हें अब अपने देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। उन्होंने भारत के लोगों की तारीफ भी की और देश में फिर से शांति लौटने की उम्मीद जताई। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता नाना पटोले ने प्रतिक्रिया दी। पटोले ने दत्त की चिंता का समर्थन किया और सुरक्षा को लेकर सरकार से ध्यान देने की बात कही।
नाना पटोले बोले- हर कोई असुरक्षित है
नाना पटोले ने कहा कि सिर्फ सेलिब्रिटी ही नहीं, बल्कि आम लोग भी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बड़े शहरों का जिक्र किया। उनके मुताबिक, महानगरों में अलग-अलग जगहों से लोग रहते हैं। ऐसे में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।
पटोले ने कहा कि अगर किसी अभिनेता को धमकियां मिल रही हैं, तो इस चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। पटोले ने संजय दत्त के बयान को गलत नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जब सेलिब्रिटी भी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, तो उनकी सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
संजय दत्त ने देश में शांति की जताई थी इच्छा
बता दें संजय दत्त ने अभिनेता शेखर सुमन के शो ‘शेखर टुनाइट’ में भारत और यहां के लोगों को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि देश के लोग बहुत प्यारे और बड़े दिल वाले हैं। उन्होंने भारतीयों की मेहमाननवाजी की भी तारीफ की। एक्टर संजय दत्त ने कहा था कि भारत में शांति होनी चाहिए। उन्होंने अपनी इच्छा जताई कि देश में फिर से वह माहौल लौटे, जिसकी उन्हें कमी महसूस हो रही है। उन्होंने इसके लिए भगवान शिव से प्रार्थना करने की बात भी कही। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई।
विवाद बढ़ने पर दत्त ने दी सफाई
इस बीच सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ने के बाद संजय दत्त ने अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि शो में हुई बातचीत पहले से तय स्क्रिप्ट के अनुसार थी। इसका उद्देश्य हल्का-फुल्का और मनोरंजक माहौल बनाना था। दत्त ने कहा कि उनका इरादा किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातों को उस संदर्भ से अलग समझा गया, जिसमें वे कही गई थीं। ‘मुन्ना भाई’ अभिनेता ने अपनी फिल्मों के ह्यूमर और ‘गांधीगिरी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों के पीछे प्यार, अपनापन और सकारात्मकता का संदेश था। अब नाना पटोले के समर्थन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

