शिवपुरी में 3 दिवसीय विषहरी पूजा आज शुरू:अररिया में बेल नेवतने के साथ तैयारियां आरंभ, स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी उत्साह

शिवपुरी में 3 दिवसीय विषहरी पूजा आज शुरू:अररिया में बेल नेवतने के साथ तैयारियां आरंभ, स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी उत्साह

अररिया शहर के शिवपुरी वार्ड संख्या-9 स्थित मां विषहरी मंदिर में तीन दिवसीय विषहरी पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शनिवार रात बेल नेवतने की रस्म के साथ पूजा का शुभारंभ हुआ। रविवार सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ विषहरी पूजा का विधिवत आगाज हुआ। निशा पूजा संपन्न होने के बाद सोमवार को मां विषहरी का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा। सोमवार देर शाम विशेष पूजा-अर्चना के बाद मेले का आयोजन भी होगा। मंगलवार को मां विषहरी की विशेष पूजा-अर्चना और हवन के साथ तीन दिवसीय पूजा का समापन होगा। स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी उत्साह शिवपुरी में आयोजित इस पूजा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी उत्साह है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां विषहरी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं। पूजा को सफल बनाने में मंदिर के पुजारी अजय यादव के साथ कैलाश राम, नागो राम, बिजेन राम, हरे राम पासवान, दिलीप ऋषिदेव सहित दर्जनों लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिवपुरी स्थित मां विषहरी मंदिर की स्थापना वर्ष 2005 में स्थानीय सविता देवी ने की थी। धीरे-धीरे यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। मां विषहरी को दिया जाता है निमंत्रण श्रद्धालुओं के अनुसार, बेल नेवतना विषहरी पूजा की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। कलश स्थापना से पहले मां विषहरी को पूजा में आने का निमंत्रण देने के लिए यह रस्म निभाई जाती है। इसके अगले दिन मां विषहरी को मंदिर परिसर में लाकर सुशोभित किया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां विषहरी के प्रति सच्ची आस्था से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। इसी विश्वास और आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर अपनी मन्नतें रखते हैं और पूजा में शामिल होते हैं। अररिया शहर के शिवपुरी वार्ड संख्या-9 स्थित मां विषहरी मंदिर में तीन दिवसीय विषहरी पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शनिवार रात बेल नेवतने की रस्म के साथ पूजा का शुभारंभ हुआ। रविवार सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ विषहरी पूजा का विधिवत आगाज हुआ। निशा पूजा संपन्न होने के बाद सोमवार को मां विषहरी का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा। सोमवार देर शाम विशेष पूजा-अर्चना के बाद मेले का आयोजन भी होगा। मंगलवार को मां विषहरी की विशेष पूजा-अर्चना और हवन के साथ तीन दिवसीय पूजा का समापन होगा। स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी उत्साह शिवपुरी में आयोजित इस पूजा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी उत्साह है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां विषहरी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं। पूजा को सफल बनाने में मंदिर के पुजारी अजय यादव के साथ कैलाश राम, नागो राम, बिजेन राम, हरे राम पासवान, दिलीप ऋषिदेव सहित दर्जनों लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिवपुरी स्थित मां विषहरी मंदिर की स्थापना वर्ष 2005 में स्थानीय सविता देवी ने की थी। धीरे-धीरे यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। मां विषहरी को दिया जाता है निमंत्रण श्रद्धालुओं के अनुसार, बेल नेवतना विषहरी पूजा की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। कलश स्थापना से पहले मां विषहरी को पूजा में आने का निमंत्रण देने के लिए यह रस्म निभाई जाती है। इसके अगले दिन मां विषहरी को मंदिर परिसर में लाकर सुशोभित किया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां विषहरी के प्रति सच्ची आस्था से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। इसी विश्वास और आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर अपनी मन्नतें रखते हैं और पूजा में शामिल होते हैं।  

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