उम्र बढ़ने और केनाइन दांत टूटने-घिसने से शिकार करने में असमर्थ बाघों को अब जंगल में मरने के लिए नहीं छोड़ा जा रहा। मानव-वन्यजीव द्वंद की आशंका वाले ऐसे बाघों को रेस्क्यू कर वन विहार लाया जा रहा है। इसी कड़ी में सिवनी का नौ साल से अधिक उम्र का बाघ और कान्हा की टी-27 यानी डीजे बाघिन वन विहार पहुंचे हैं। दोनों को 21 दिन के क्वारंटाइन में रखा गया है। वन विहार में वर्तमान में 18 बाघ हैं। पहले उम्रदराज बाघ टेरिटरी की लड़ाई और शिकार की क्षमता घटने के बाद बफर जोन में पहुंचते थे। कई बार मृत शिकार के भरोसे रहते और कमजोर होकर मर जाते थे। लाए गए बाघों के साथ भी ऐसा हो सकता था। सिवनी बाघ के हमले में 6 लोगों की मौत,2 घायल बरघाट-सिवनी क्षेत्र के 9 वर्ष से अधिक उम्र के बाघ के केनाइन दांत टूट चुके थे। शिकार में परेशानी के कारण वह आसान शिकार की तलाश में इंसानी इलाकों तक पहुंचा। उसके हमले में 6 लोगों की मौत और 2 घायल हुए। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद डॉ. अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में रेस्क्यू कर उसे वन विहार लाया गया। कान्हा की टी-27 बाघिन ‘डीजे’ के केनाइन दांत पूरी तरह घिस चुके थे। प्राकृतिक शिकार में परेशानी से वह बालाघाट के पर्रापुर गांव की बस्ती में पहुंची। महिला पर हमले के बाद उसे ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि दोनों बाघों को इंसानों से दूर रखकर व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है। दोनों स्वस्थ हैं और भोजन कर रहे हैं। इन बाघों को लाया गया बाघ व्यवहार का अध्ययन
दोनों बाघों के व्यवहार का भी अध्ययन किया जा रहा है और क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद उनकी आगे की देखभाल इसी आधार पर तय की जाएगी। -विजय कुमारी, डायरेक्टर वन विहार

