शादी पर रोक और सख्त ड्यूटी!:राष्ट्रपति के ADC पद पर चयन कितना मुश्किल? राजस्थान की नव्या की एंट्री क्यों है खास

शादी पर रोक और सख्त ड्यूटी!:राष्ट्रपति के ADC पद पर चयन कितना मुश्किल? राजस्थान की नव्या की एंट्री क्यों है खास

‘मेरी शादी नहीं हुई है… एडीसी के लिए एक सख्त नियम है कि वे शादी नहीं कर सकते। उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ता है और मुझे लगता है कि यह सबसे बड़ा त्याग है।’ यह खुलासा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के तौर पर काम कर चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल (रिटायर्ड) ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में किया। सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के बाद सांब्याल ने राष्ट्रपति भवन के इस बेहद पावरफुल लेकिन इस चुनौतीपूर्ण पद को लेकर कई अहम खुलासे किए। इस इंटरव्यू के बाद हर कोई यही जानना चाहता है कि क्या वाकई इसके पीछे मुश्किल चयन प्रक्रिया, जिसमें सबसे बड़ी शर्त- इस पद पर रहते हुए ‘अविवाहित’ रहना शामिल है। आखिर राष्ट्रपति के ADC का चयन कैसे होता है? उनका असली काम क्या होता है और इस जिम्मेदारी को इतना खास क्यों माना जाता है? और राजस्थान की बेटी नव्या शेखावत कैसे यहां तक पहुंचीं, यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ADC कौनसी पोस्ट है और बनने के लिए क्या करना पड़ता है?
जवाब: ADC फ्रांसीसी मूल का शब्द है। इस नाम का पूरा मतलब Aide-de-Camp होता है। यह राष्ट्रपति के सैन्य सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी होते हैं। ADC बनने के लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती। न ही कोई अलग से सरकारी भर्ती निकलती है। NDA, CDS या संबंधित सेवा की दूसरी परीक्षा से थल सेना, नौसेना या वायुसेना में अधिकारी होना जरूरी है। नव्या CDS के जरिए सेना में आईं। बाद में उनके सर्विस रिकॉर्ड, प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन के आधार पर उन्हें शॉर्टलिस्ट किया गया। ये चयन प्रक्रिया पूरी तरह आंतरिक होती है। इस पद पर चयन के लिए सिर्फ अच्छा रिकॉर्ड ही काफी नहीं होता है। ADC को राष्ट्रपति के साथ देश-विदेश के कार्यक्रमों में मौजूद रहना होता है। इसलिए व्यवहार, व्यक्तित्व और दबाव में काम करने की काबिलियत भी बहुत मायने रखती है। सवाल-2: राष्ट्रपति के ADC का काम क्या होता है?
जवाब: इनका मुख्य काम आधिकारिक कार्यक्रमों और राष्ट्र प्रमुख के दौरों के दौरान सैन्य-प्रोटोकॉल, व्यवस्था और तालमेल संभालना है। कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपति के आगमन से लेकर मंच तक पहुंचने की व्यवस्था, सैन्य परंपराओं के पालन और औपचारिक कार्यक्रमों को सुचारू रूप से पूरा कराना इनकी जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही राष्ट्रपति भवन और सेना के बीच आधिकारिक संपर्क और समन्वय भी इन्हीं अफसरों के जरिए होता है। ये अधिकारी राष्ट्रपति के ‘पर्सनल असिस्टेंट’ नहीं होते, बल्कि तीनों सेनाओं के एक्टिव ड्यूटी अफसर होते हैं, जिन्हें विशेष सैन्य-प्रोटोकॉल के लिए तैनात किया जाता है। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति के पास कुल 5 आधिकारिक ADC होते हैं। इनमें 3 थल सेना, 1 नौसेना और 1 वायुसेना से चुने जाते हैं। मेजर नव्या शेखावत थल सेना के कोटे से ही इस पद पर तैनात हुई हैं। सवाल-3: क्या ADC शादी नहीं कर सकते?
जवाब: भारत के राष्ट्रपति के ADC का पद केवल एक सैन्य जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े सबसे कड़े प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी है। पूर्व ADC और रिपोट्‌र्स के अनुसार, इस पद के लिए चयन और तैनाती से जुड़ी कई कठिन शर्तें भी शामिल रहती हैं। जिनमें… 1. कार्यकाल के दौरान ‘अविवाहित’ रहने की शर्त : इस पद पर तैनात अधिकारी, अपने पूरे कार्यकाल के दौरान शादी नहीं कर सकते। जिसकी बड़ी वजहें उनकी 24×7 की अलर्ट ड्यूटी, अनिश्चित कार्य-घंटे, देश-विदेश के दौरे और बिना किसी तय छुट्टी के काम करना शामिल है। इस व्यस्तता के कारण व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन के लिए समय निकाल पाना बेहद मुश्किल सा माना जाता है। राष्ट्रपति के पूर्व ADC रह चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने एक इंटरव्यू में इसका जिक्र किया है। उनका कहना रहा कि ADC के लिए ऐसा क्लॉज होता है, जिसके तहत कार्यकाल के दौरान शादी नहीं की जा सकती। 2. बेदाग सर्विस रिकॉर्ड : अधिकारी की पूरी सैन्य सेवा के दौरान शून्य अनुशासनात्मक रिकॉर्ड होना जरूरी है। उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR), सैन्य प्रशिक्षण प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता का स्कोर उच्चतम श्रेणी में होना चाहिए। 3. कड़ा व्यक्तित्व व व्यवहार मानदंड: अधिकारी की शारीरिक फिटनेस, सही मुद्रा और अनुशासन को परखा जाता है। राष्ट्रपति के साथ देश-विदेश के राष्ट्राध्यक्षों और वीआईपी के बीच रहना होता है, इसलिए टेबल मैनर्स, बातचीत की भाषा और राजनयिक शिष्टाचार पर भी मजबूत पकड़ जरूरी माना जाता है। इसके अलावा किसी भी अचानक परिस्थिति में बिना घबराए तुरंत काम संभालने की क्षमता भी परखी जाती है। 4. टॉप-सीक्रेट सुरक्षा क्लीयरेंस: क्योंकि, ADC हर समय राष्ट्रपति के बिल्कुल करीब रहते हैं, इसलिए कई बड़ी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत बैकग्राउंड की एकदम बारीकी से जांच की जाती है। 5. कई स्तर पर स्क्रीनिंग : सबसे पहले सेनाओं के मुख्यालय अपने सबसे योग्य अधिकारियों के नामों की सिफारिश करते हैं। अंतिम साक्षात्कार राष्ट्रपति भवन की उच्च स्तरीय समिति की ओर से लिया जाता है। सुरक्षा और सभी मैराथन राउंड पूरे होने के बाद फाइनल चयन को स्वीकृति भारत के राष्ट्रपति की ओर से दी जाती है। उनकी मंजूरी के बाद नियुक्ति पत्र जारी होता है। 6. व्यक्तिगत आजादी पर पाबंदियां: इसमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल, मीडिया से बातचीत और निजी यात्राओं पर कुछ खास सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी हो जाता है। इसके अलावा सख्त ड्यूटी मोड में रहने के कारण निजी जीवन और सामाजिक जीवन लगभग पूरी तरह सीमित हो जाता है। सवाल-4: ADC का कार्यकाल कितना होता है?
जवाब: ADC कोई स्थायी नौकरी या अलग कैडर नहीं है। यह सैन्य करियर के दौरान मिलने वाली विशेष जिम्मेदारी होती है। आमतौर पर इनका कार्यकाल दो से तीन साल का होता है। अवधि पूरी होने के बाद अधिकारी अपनी मूल यूनिट या रेजिमेंट में लौट जाते हैं। कुछ परिस्थितियों में कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है, लेकिन यह संबंधित प्राधिकारी के फैसले पर निर्भर करता है। सवाल-5: मेजर नव्या की नियुक्ति इतनी खास क्यों?
जवाब : नव्या की नियुक्ति इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह थल सेना से इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। साथ ही तीनों सेनाओं में यह जिम्मेदारी संभालने वाली कुल दूसरी महिला अधिकारी भी हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की नहीं। यह उस बदलाव का हिस्सा भी है, जिसमें महिलाओं के लिए सेना की जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ रहा है। राष्ट्रपति के साथ खड़ी नव्या की तस्वीर के पीछे CDS परीक्षा, कठिन प्रशिक्षण, पांच साल की सेवा और एक सख्त चयन प्रक्रिया है। यही वजह है कि सीकर की इस बेटी की नियुक्ति को सेना के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

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