पीलीभीत में मतदाता सूची को लेकर विवाद के बीच शासन ने शुक्रवार देर शाम दो एसडीएम का ट्रांसफर कर दिया। मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को जिले से हटा दिया गया है। उनकी जगह मंधाता प्रताप सिंह और अजय कुमार को पीलीभीत में एसडीएम बनाया गया है। प्रदेश में कुल 11 पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। मयंक गोस्वामी लखनऊ और हेमंत चौधरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भेजे गए शासन के आदेश के मुताबिक, मयंक गोस्वामी को लखनऊ स्थित चकबंदी मुख्यालय में बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) बनाया गया है। वहीं, हेमंत चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लखनऊ में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) की जिम्मेदारी दी गई है। मंधाता प्रताप सिंह राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में तैनात थे, जबकि अजय कुमार लखनऊ के चकबंदी मुख्यालय में बंदोबस्त अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। दोनों को पीलीभीत भेजा गया है। कांग्रेस ने 13 हजार वोटरों के नाम में गड़बड़ी का आरोप लगाया मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला 15 अक्टूबर को सामने आया था। समाजवादी पार्टी ने ज्ञापन देकर मतदाता सूची में मतदाताओं और उनके पिता के नाम में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था। इसके बाद कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने मामले की जानकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई। कांग्रेस प्रदेश कमेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिले में 13 हजार से अधिक वोटरों के नाम में गड़बड़ी और करीब 2,600 वोट काटे जाने का आरोप लगाया था। पार्टी ने इस संबंध में सबूत पेश करने का भी दावा किया था। एसडीएम समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज प्रारंभिक जांच के बाद एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी समेत तीन लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में स्थानीय राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायतें की थीं। मतदाता सूची की निगरानी में थी दोनों अधिकारियों की भूमिका मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और प्रशासनिक नोडल अधिकारी के तौर पर मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे थे। ऐसे में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे थे। विपक्षी दलों ने दोनों अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके तबादले और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब शासन ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया है। हालांकि, तबादले को मतदाता सूची विवाद से जोड़ने के संबंध में शासन की ओर से कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

