वर्ष 2023 में प्रदेश के ऐसे सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को, जो 35 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हैं या आगे करेंगे, चौथा समयमान वेतनमान स्वीकृत किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश के पालन में सभी विभागों के पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन वर्ष पूर्व ही चौथा समयमान वेतनमान स्वीकृत हो चुका है। जिस मंत्रालय से आदेश निकला, उसी मंत्रालय के कर्मचारियों को तीन वर्ष बाद भी चौथे समयमान वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है। विधानसभा और राजभवन के कर्मचारियों को भी यह लाभ नहीं मिला है। इससे आंदोलन की स्थिति बनने लगी है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि शिक्षक संवर्ग और पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संवर्ग समयमान वेतनमान योजना में नहीं आते थे। इन संवर्गों ने क्रमोन्नति योजना में ही बने रहने का विकल्प चुना था, लेकिन इन संवर्गों को भी चौथे समयमान वेतनमान का लाभ दे दिया गया। जिस सामान्य प्रशासन विभाग के अनुमोदन से सभी विभागों को चौथा समयमान मिल रहा है, खुद उसी सामान्य प्रशासन विभाग के कर्मचारी चौथे समयमान वेतनमान से वंचित हैं। मंत्रालयीन कर्मचारियों को न तो चौथा समयमान वेतनमान दिया जा रहा है और न ही लिखित रूप में देने से मना किया जा रहा है। इस कारण वेतनमान देने में आनाकानी नायक ने कहा कि ब्रह्मस्वरूप समिति और अग्रवाल आयोग की अनुशंसा के आधार पर मंत्रालय सेवा के दो संवर्गों, सहायक अनुभाग अधिकारी और अनुभाग अधिकारी, को प्रदेश से अलग वेतनमान स्वीकृत किए गए थे और वैसे भी ये संवर्ग केवल मंत्रालय सेवा में ही होते हैं। इसी को आधार बनाकर मंत्रालय के चौथे समयमान वेतनमान में अनावश्यक रोड़ा अटकाया जा रहा है। यह प्रकरण कैबिनेट के अनुमोदन के लिए भेजा जाना है, जो कि तीन साल से नहीं भेजा गया, जबकि चौथा समयमान वेतनमान 35 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वालों को ही मिलना है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए नगण्य व्ययभार आना है। कतिपय अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण यह निर्णय रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष तक पदोन्नतियां बंद रहीं और अब चौथा समयमान न मिलने से मंत्रालयीन कर्मचारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ इस संबंध में अनेक बार ज्ञापन दे चुका है और वार्ताएं कर चुका है। अब मंत्रालय में आंदोलन की स्थिति निर्मित हो रही है।

