चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में 7 साल बाद बीजेपी का सभापति:अब ईनाणी संभालेंगे शहर की जिम्मेदारी; कांग्रेस बोर्ड के बाद हुई BJP की वापसी

चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में 7 साल बाद बीजेपी का सभापति:अब ईनाणी संभालेंगे शहर की जिम्मेदारी; कांग्रेस बोर्ड के बाद हुई BJP की वापसी

चित्तौड़गढ़ नगर पालिका से इसके नगर परिषद बनने तक करीब 91 साल के सफर में शहर को फिर नया सभापति मिल गया है। अनिल कुमार ईनाणी चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के चौथे सभापति बने हैं। उनके सभापति बनने के साथ ही नगर परिषद में भाजपा का दूसरी बार बोर्ड भी बना है। इससे पहले साल 2014 से 2019 तक भाजपा के सुशील कुमार शर्मा नगर परिषद के सभापति रह चुके हैं। करीब 7 साल बाद भाजपा ने फिर नगर परिषद की सत्ता हासिल की है। इस बार सभापति पद अनारक्षित (ओपन) वर्ग के लिए रखा गया था, जिसके चलते सभी वर्गों के नेताओं के लिए इस पद की दावेदारी का रास्ता खुला था। भाजपा ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे अनिल ईनाणी को जिम्मेदारी दी और उन्होंने चुनाव जीतकर नगर परिषद की कमान संभाली। 2012 में बनी नगर परिषद, अब तक 4 ने संभाली सभापति की कुर्सी चित्तौड़गढ़ नगर परिषद की स्थापना साल 2012 में हुई थी। इसके बाद शहर को अब तक चार सभापति मिले हैं। नगर परिषद बनने के बाद सबसे पहले कांग्रेस की गीता देवी योगी को सभापति बनने का मौका मिला। उन्होंने साल 2012 से 2014 तक नगर परिषद की पहली सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद साल 2014 से 2019 तक भाजपा के सुशील कुमार शर्मा सभापति रहे। उनके कार्यकाल में पहली बार भाजपा का बोर्ड नगर परिषद में बना था। इसके बाद कांग्रेस के संदीप शर्मा ने सभापति पद संभाला। अब भाजपा के अनिल कुमार ईनाणी शहर के चौथे सभापति बन गए हैं। नगर परिषद बनने के बाद अब तक तीन पुरुष सभापति और एक महिला सभापति शहर को मिली हैं। गीता देवी योगी ऐसी पहली महिला नेता थीं, जिन्होंने नगर पालिका और नगर परिषद दोनों की अध्यक्षता की। अनिल ईनाणी लगातार तीसरे पुरुष सभापति हैं, जिन्हें चित्तौड़गढ़ नगर परिषद की जिम्मेदारी मिली है। 1935 में बनी नगर पालिका, शहर ने देखे कई राजनीतिक बदलाव चित्तौड़गढ़ की स्थानीय निकाय राजनीति का इतिहास नगर परिषद बनने से काफी पुराना है। चित्तौड़गढ़ नगर पालिका की स्थापना साल 1935 में हुई थी। उस समय गौरी शंकर दशोरा नगर पालिका के पहले अध्यक्ष बने थे। इसके बाद शहर की स्थानीय राजनीति में कई बदलाव आए और अलग-अलग समय पर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने नगर पालिका और नगर परिषद की जिम्मेदारी संभाली। नगर पालिका से नगर परिषद बनने तक के सफर में महिला नेतृत्व की भी अहम भूमिका रही है। कांग्रेस की आनंद कंवर सान्दू साल 1999 से 2004 तक नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। इसके बाद भाजपा की नीरू अहीर साल 2004 में नगर पालिका अध्यक्ष बनीं और करीब 11 महीने तक पद पर रहीं। वहीं कांग्रेस की गीता देवी योगी साल 2009 से 2012 तक नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। नगर परिषद बनने के बाद भी उन्हें पहली सभापति बनने का अवसर मिला। इस तरह वे शहर की ऐसी पहली महिला नेता बनीं, जिन्होंने नगर पालिका और नगर परिषद दोनों की कमान संभाली। अनारक्षित सीट पर भाजपा ने संगठन के पुराने चेहरे पर जताया भरोसा इस बार नगर परिषद चुनाव में भाजपा के 33 पार्षद जीतकर आए थे। कांग्रेस के 23 पार्षद और चार निर्दलीय पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। सभापति चुनाव में अनिल ईनाणी को भाजपा के 33 पार्षदों के साथ तीन निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिला और उन्होंने 36 वोट हासिल किए। कांग्रेस प्रत्याशी नगेंद्र सिंह राठौड़ को 24 वोट मिले। ईनाणी की जीत के साथ ही भाजपा ने नगर परिषद में अपना बोर्ड बना लिया। राजनीतिक रूप से यह भाजपा के लिए जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कार्यकाल में कांग्रेस का बोर्ड था। अब भाजपा के सामने अपने बहुमत को कामकाज में बदलने की चुनौती रहेगी। एबीवीपी से शुरू हुआ सफर, भाजपा संगठन में निभाई कई जिम्मेदारियां अनिल कुमार ईनाणी का राजनीतिक सफर छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ। साल 1998 में वे एबीवीपी से जुड़े और संगठन में सचिव पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने संगठन में रहते हुए लगातार काम किया और अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा में आने के बाद वे पार्टी संगठन में सक्रिय रहे और वर्तमान में नगर महामंत्री पद पर कार्यरत हैं। वे राजस्थान स्काउट गाइड के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। दो बार पार्षद रहे, अब संभालेंगे पूरे शहर की जिम्मेदारी अनिल ईनाणी नगर परिषद की राजनीति से पहले से जुड़े रहे हैं। साल 2019 में वे वार्ड नंबर 38 से पार्षद चुने गए थे। इसके बाद हाल ही में हुए नगर परिषद चुनाव में वे वार्ड नंबर 15 से चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत संत को 379 मतों से हराया। इस चुनाव में उन्हें कुल 696 वोट मिले। पार्षद के रूप में दो बार चुनाव जीतने के बाद अब उन्हें सभापति पद की जिम्मेदारी मिली है। नगर परिषद की कार्यप्रणाली, शहर की समस्याओं और विकास कामों की जानकारी उनके लिए काम आएगी। राजनीति के साथ प्रॉपर्टी कारोबार में भी सक्रिय अनिल ईनाणी ने साल 1990 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। वे प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हुए हैं। वे चारभुजा कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और तुलसी रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स के संचालक हैं। सभापति बनने के बाद अनिल ईनाणी ने कहा- चित्तौड़गढ़ की जनता ने भाजपा पर विश्वास जताकर बोर्ड बनाने का मौका दिया है। शहरवासियों के साथ भाजपा नेतृत्व, सांसद सीपी जोशी, विधायक और चुनाव में लगी पूरी टीम का आभार। मेरी पहली प्राथमिकता शहर का विकास रहेगा। इसके लिए सांसद और विधायक के सहयोग से राज्य सरकार और केंद्र सरकार से जरूरत के अनुसार बजट लाने का प्रयास किया जाएगा। नगर परिषद में कुछ नए काम और नए प्रयोग करने की कोशिश रहेगी, जिससे शहर को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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