विश्व पर्यटन दिवस: रोपवे बना तो बदल जाएगा तारागढ़ का नक्शा, 870 मीटर की ऊंचाई से दिखेगा पूरा अजमेर

विश्व पर्यटन दिवस: रोपवे बना तो बदल जाएगा तारागढ़ का नक्शा, 870 मीटर की ऊंचाई से दिखेगा पूरा अजमेर

Ajmer Taragarh Fort Ropeway Project: चौहानकाल में बना तारागढ़ किला (गढ़बीठली) शानदार पर्यटक स्थल बन सकता है। इसके लिए रोपवे प्रोजेक्ट सबसे अहम है। इससे देश-दुनिया के पर्यटकों को अरावली की दुर्गम पहाड़ियों में ट्रैकिंग और शहर का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है।

चौहानकाल में 11वीं शताब्दी में अरावली की पहाड़ी पर तारागढ़ किला बनाया गया था। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 870 मीटर (लगभग 2,854 फीट) है। अभी तारागढ़ पहुंचने का एकमात्र जरिया सड़क मार्ग है। घुमावदार मार्ग होने से यह बेहद जोखिमभरा है।

बूम पर पहुंच सकता है पर्यटन

तारागढ़ अजमेर संभाग का सबसे ऊंचा किला है। यहां से पूरे शहर का नजारा देखा जा सकता है। रोपवे बनने पर अजमेर के पर्यटन को बूम मिल सकता है। सरकार, जिला प्रशासन तथा नगर निगम को भी 100 करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व मिल सकता है। राजस्थान पत्रिका के प्रयासों से 2026-27 के बजट में 20 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

ajmer taragarh fort ropeway
रेापवे (फाइल फोटो)

अभी यूं पहुंचते हैं पर्यटक

तारागढ़ तक जाने के लिए पर्यटकों को डिग्गी बाजार से निजी या टैक्सी वाहनों से जाना पड़ता है। अधिक सवारी बैठाने की वजह से हादसे का डर बना रहता है। रोपवे बनने के बाद सफर सुरक्षित होने के साथ ही एडवेंचरस हो जाएगा।

ऐसे तैयार हुआ रोपवे प्रोजेक्ट

तारागढ़ किले तक रोपवे प्रोजेक्ट के लिए 7-8 साल पहले कोशिश हुई। प्राइवेट कंपनी ने दरगाह-नागफणी इलाके में नई सड़क और आसपास के इलाके का सर्वे किया। नगर निगम, प्रशासन और पुलिस, वन विभाग से एनओसी के लिए पत्र लिखा। पुष्कर में सावित्री माता मंदिर रोपवे का निर्माण करने वाली कंपनी ने डीपीआर भी बनाई। वन भूमि पर रोपवे के पिलर लगाने की योजना बनाई गई। पीपीपी मोड पर संचालित करने की चर्चा की गई। इसे मंजूरी फिलहाल नहीं मिल पाई है।

रोपवे प्रोजेक्ट से यूं बढ़ेगा पर्यटन

  • तारागढ़ स्थित जमीन पर आवास-टेंट हाउस
  • रेलवे कैफेटेरिया, होटल अथवा रेस्टोरेंट
  • पहाड़ पर रेलवे म्यूजियम और सर्किट हाउस
  • बन सकता है नायाब गार्डन और मैरिज हॉल
  • रेलवे का राजस्थान में सबसे ऊंचाई पर दफ्तर

फैक्ट फाइल

  • 1,400 साल से भी पुराना है तारागढ़
  • 3 प्रवेश द्वार हैं किले में आवाजाही के लिए
  • 10 हजार वर्ग मीटर इलाके में फैली हैं दीवारें
  • 1832 में नसीराबाद के सैनिकों के लिए बनाया गया सेनेटोरियम
  • 1983-84 में पहाड़ी काटकर बनाई गई थी रोड

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