विशाखापत्तनम, तीन नवंबर आंध्र प्रदेश में सोमवार देर रात हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की रिफाइनरी के पिच इंटरमीडिएट भंडारण टैंक में आग लग गई, जिस पर जल्द ही काबू पा लिया गया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एचपीसीएल के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि आग लगने की इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई और न ही कोई घायल हुआ।
सोमवार रात करीब 10 बजे विशाखापत्तनम में एचपीसीएल की रिफाइनरी से आग की ऊंची लपटें उठने और काले धुएं का घना गुबार निकलने से शहर में अफरा-तफरी मच गई। महारत्न कंपनी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘दो नवंबर को रात करीब 10 बजे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाख रिफाइनरी के पिच इंटरमीडिएट भंडारण टैंक में आग लगने की घटना हुई। आग पिच टैंक क्षेत्र तक ही सीमित रही और थोड़े समय में उस पर काबू पा लिया गया।
इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।’’
एचपीसीएल के अनुसार, रिफाइनरी की अग्निशमन और सुरक्षा टीम ने ‘‘तत्काल आग बुझाने और आपात स्थिति से निपटने के उपाय शुरू किए।’’
कंपनी ने बताया कि आग पर काबू पाने के बाद रिफाइनरी की सभी इकाइयां सुरक्षित रूप से काम कर रही हैं। कंपनी ने कहा, ‘‘एचपीसीएल सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों के उच्चतम मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है।’’
विशाखापत्तनम स्थित एचपीसीएल रिफाइनरी की क्षमता सालाना 1.5 करोड़ मीट्रिक टन (एमएमटीपीए) है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिफाइनरी ने शानदार प्रदर्शन किया और 1.604 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया, जो अब तक का उसका सर्वाधिक सालाना प्रसंस्करण है।
विशाख रिफाइनरी की शुरुआत भारत के पूर्वी तट की पहली तेल रिफाइनरी के रूप में हुई थी। इसे कैल्टेक्स ऑयल रिफाइनिंग इंडिया लिमिटेड (कोरिल) ने 1957 में शुरू किया था और उस समय इसकी कच्चे तेल के प्रसंस्करण की क्षमता सालाना 6.75 लाख मीट्रिक टन थी। बाद में, विभिन्न चरणों में इसका विस्तार कर इसकी क्षमता सालाना 1.5 करोड़ मीट्रिक टन कर दी गई।
बाद में, 1976 में कैल्टेक्स रिफाइनरी और उसकी विपणन सुविधाओं का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और 1978 में इसका एचपीसीएल में विलय कर दिया गया। वर्तमान में एचपीसीएल की विशाख रिफाइनरी में एलपीजी, प्रोपलीन, नेफ्था, मोटर स्पिरिट (एमएस), विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), सुपीरियर केरोसिन ऑयल (एसकेओ), हाई स्पीड डीजल (एचएसडी), लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ), लो सल्फर हैवी स्टॉक (एलएसएचएस), इंडस्ट्रियल फ्यूल ऑयल (आईएफओ), बिटुमेन, सल्फर और वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल (वीएलएसएफओ) का उत्पादन होता है।

