विपक्ष की रामलीला रैली के विरोध में भाजपा का मार्च:आरोप- 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी, 1984 में इसी दिन सिख विरोधी हिंसा हुई थी

विपक्ष की रामलीला रैली के विरोध में भाजपा का मार्च:आरोप- 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी, 1984 में इसी दिन सिख विरोधी हिंसा हुई थी

INDIA ब्लॉक की रामलीला मैदान में रैली के विरोध में भाजपा आज दिल्ली में मार्च निकालेगी। यह मार्च पश्चिमी दिल्ली में हरि नगर से तिलक नगर करीब एक किमी तक निकाला जाएगा। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मार्च का नेतृत्व करेंगे। इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार, सिख समुदाय समेत 5000 लोग शामिल होंगे। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने रामलीला मैदान में रैली करने के लिए 1 नवंबर का दिन जानबूझकर चुना है। 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी हिंसा हुई थी। ऐसे में कांग्रेस ने इसी तारीख को रैली रखकर सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पहले से जारी भाजपा ने यह अभियान विपक्ष के ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए शुरू किया है। इसके जरिए पार्टी SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का बचाव कर रही है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष के सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाना चाहती है। अभियान कब शुरू हुआ और कितने दिन चलेगा? 22 अक्टूबर 2026 से अभियान की तैयारी और संगठनात्मक निर्देश जारी हुए। 23 अक्टूबर को इसकी देशव्यापी रूपरेखा सार्वजनिक हुई। पहला चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलेगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्य इकाइयों को अभियान चलाने के निर्देश दिए। शुरुआत में इसका नारा ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ रखा गया था। बाद में ‘भीड़तंत्र’ की जगह ‘अराजकता’ शब्द कर दिया गया। भाजपा की अभियान चलाने के पीछे 4 वजहें… 1. SIR का समर्थन: विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठा रहा है। भाजपा का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। 2. वोट चोरी के आरोपों का जवाब: राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को भ्रामक बताकर जनता के बीच अपना पक्ष रखना चाहती है। 3. चुनाव आयोग का बचाव: भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर बिना आधार आरोप लगाकर उसकी विश्वसनीयता कमजोर की जा रही है। 4. कांग्रेस और विपक्ष को घेरना: भाजपा विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रही है। अब तक कितने कार्यक्रम हो चुके हैं और कहां-कहां?

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