विधानसभा चुनाव 2027 की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 4 जनवरी 2027 को होगा। भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी किया है। देश और प्रदेश में एसआईआर की मतदाता सूची के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच चुनाव आयोग ने अब SSR (स्पेशल समरी रिविजन) कराने का निर्णय किया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से 1 जनवरी 2027 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के लिए विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी जारी किया है। मतदेय स्थलों का संभाजन एवं पुनर्गठन 02 नवंबर, 2026 तक पूरा किया जाएगा। एकीकृत निर्वाचक नामावलियों का ड्राफ्ट प्रकाशन 12 नवंबर, 2026 को किया जाएगा। इसके उपरांत, दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि 12 नवंबर से 11 दिसंबर, 2026 तक निर्धारित की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पुनरीक्षण के दौरान प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर, 2026 तक किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन 04 जनवरी, 2027 को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ राज्य एवं जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर आयोग के दिशा निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार पुनरीक्षण की प्रक्रिया संपन्न कराते हुए उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को अद्यतन किया जाएगा। जो मतदाता एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से वंचित रह गए थे या किसी कारण से उनका नाम सूची में शामिल नहीं हुआ था वे आयोग की ओर से निर्धारित फार्म और आवश्यक दस्तावेज जमा कराकर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं।
2.04 करोड़ नाम कटे थे यूपी में एसआईआर के दौरान 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे थे। एसआईआर से पहले यूपी में 15.44 करोड़ मतदाता थे, जबकि एसआईआर के बाद 13.39 करोड़ मतदाता रह गए।
राजनीतिक दल लगाएंगे ताकत मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम में भाजपा और सपा सहित सभी राजनीतिक दल ताकत लगाएंगे। एसआईआर के दौरान सामने आया था कि भाजपा के कब्जे वाली विधानसभा सीटों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटे हैं। इसलिए इस बार भाजपा ने अधिक से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की तैयारी की है। वहीं सपा की ओर से अपने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में यथावत रखवाने और नए मतदाताओं के नाम शामिल कराने के लिए पुख्ता तैयारी की है।

