अब भारतीय कारोबारी विदेश में सामान बेचकर उसका भुगतान सिर्फ डॉलर या यूरो में लेने के लिए मजबूर नहीं होंगे। विदेशी खरीददार भारतीय रुपए (Indian Rupee) में भी भुगतान कर सकेगा और निर्यातक को मिलने वाले व्यापारिक लाभ पहले की तरह मिलेंगे। यानी भारत सरकार रुपए पर विदेशी मुद्रा के समान ही छूट-प्रोत्साहन और सारे फायदे देगी। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा। अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई। रुपए में मिलने वाले पात्र निर्यात भुगतान को विदेशी मुद्रा में मिलने वाले भुगतान के बराबर दर्जा मिलने से अंतरराष्ट्रीय कारोबार में रुपए का रुतबा बढ़ेगा। अपनी मुद्रा में निर्यात से रूपए को मज़बूती मिलेगी।
साइलेंट स्ट्रेटजी के तहत रूपए को बढ़ाया आगे
दरअसल दुनिया के 13 से ज़्यादा एशियाई, अफ्रीकी और मिडिल ईस्टर्न देश डॉलर के मुकाबले किसी दूसरे विकल्प को चाहते हैं। इसके चलते अब रुपए को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में साइलेंट स्ट्रेटजी के तहत आगे बढ़ाया है। इससे फिलहाल चुनिंदा देशों में रुपया सीधे तौर पर डॉलर का विकल्प बन सकता है। इसका दूरगामी असर भी दिख सकता है।
क्यों पड़ी ज़रूरत?
सूत्रों के मुताबिक इस बदलाव की ज़रूरत दुनिया के 13 से ज़्यादा देशों की आवश्यकता के चलते की गई है। दरअसल रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) और ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बाद इसकी ज़रूरत बढ़ गई। यूक्रेन से युद्ध के बाद रूस के लिए डॉलर मुश्किल हुआ, जबकि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद ईरान के लिए डॉलर मुसीबत बना। इन दोनों देशों से भारत का काफी आयात-निर्यात है। इनके अलावा अनेक एशियाई, अफ्रीकी और मिडिल ईस्टर्न देश भी डॉलर का विकल्प चाहते हैं।
किस पर क्या असर?
भारत के लिए विदेशी मुद्रा का दबाव कम होगा। वैश्विक शक्ति बनने में मज़बूती मिलेगी।अमेरिका की वैश्विक पावर को चुनौती मिलेगी। डॉलर कमजोर होगा। दूसरे देश जो डॉलर से परेशान है, उनके लिए विदेशी कारोबार आसान होगा। कारोबारियों के लिए भुगतान आसान व तेज़ होगा। मध्यम स्तर का व्यापार बढ़ेगा। आम आदमी के लिए दूरगामी तौर पर महंगाई नियंत्रित रहेगी।
भारत का बड़ा लक्ष्य: रुपए को कारोबार की वैश्विक मुद्रा बनाना
भारत पिछले कुछ वर्षों से रुपए के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर काम कर रहा है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वोस्ट्रो खाते और सीमा पार भुगतान की व्यवस्थाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार का नया फैसला इस रणनीति को निर्यात के स्तर पर और मज़बूती देता है। फर्क इतना है कि अब संदेश सिर्फ यह नहीं है कि ‘रुपए में भुगतान कर सकते हैं’, बल्कि यह भी है कि ‘रुपए में भुगतान लेने पर व्यापारिक लाभ बने रहेंगे।
एफटीए में क्या मंजूरी?
भारत 130 से ज़्यादा देशों से व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा कर रहा है। करीब 35 से एफटीए के कुछ चरण पूरे हो गए हैं। इनसे द्विपक्षीय व्यापार में भी अधिकतर देशों को रुपए के लिए निर्धारित सेटलमेंट फ्रेमवर्क पूरा करना होता है। इसमें इसलिए सीधे तौर पर इन देशों से रुपए में व्यापार नहीं होता। नए बदलाव से एफटीए या बिना एफटीए सीधे रुपए में भुगतान हो सकेगा।

