रायबरेली के साकेत नगर (वार्ड नंबर आठ) में पिछले कई दिनों से बना गंभीर जलभराव का संकट विकराल रूप ले चुका है। स्थानीय निवासी अरविंद कुमार सोनी ने क्षेत्र की बदहाली बयां करते हुए बताया कि मुख्य रास्तों पर पानी जमा होने से बुजुर्गों, बच्चों और दैनिक काम-काज वाले लोगों का निकलना दूभर हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि दूधवाले और अन्य राशन विक्रेताओं को गाड़ियों के बजाय पैदल ही जोखिम उठाकर जाना पड़ रहा है। जलभराव की समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों ने नगरपालिका के चक्कर लगाए और अधिकारियों को लिखित आवेदन भी दिए। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकाला गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आवेदन देने पर नगरपालिका के जिम्मेदार यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “अभी बजट नहीं है, जब आएगा तब देखेंगे। संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का बढ़ता प्रकोप सड़कों पर कई दिनों से जमा दूषित पानी में काई जम चुकी है, जिससे न केवल यातायात पूरी तरह प्रभावित है, बल्कि क्षेत्र में गंभीर स्वास्थ्य संकट मंडरा रहा है। ठहरे हुए गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने की पूरी आशंका बनी हुई है।
अध्यक्ष-सभासदों की आपसी लड़ाई में पिस रही जनता
नगरपालिका क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ने के पीछे पालिका अध्यक्ष सत्रोहन सोनकर और वार्ड सभासदों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को जिम्मेदार बताया जा रहा है। आए दिन सभासद बोर्ड बैठकों का बहिष्कार कर देते हैं और अध्यक्ष के खिलाफ धरने पर बैठ जाते हैं। बैठकों के न होने से वार्डों के विकास और निर्माण से जुड़े आवश्यक प्रस्ताव पास नहीं हो पा रहे हैं।
जनता ने जिस विश्वास के साथ अध्यक्ष और सभासदों को वोट देकर कुर्सी पर बैठाया था, वे अब विकास कार्यों की अनदेखा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त हैं। जनप्रतिनिधियों के आपसी झगड़े और पालिका प्रशासन की नाकामी की कीमत साकेत नगर की जनता अपनी बुनियादी सुविधाओं और सेहत को दांव पर लगाकर चुका रही है।

