राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने को लेकर अपना फैसला टाल दिया है। कोर्ट अब 30 सितंबर को यह तय करेगा कि लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत आरोप तय किए जाएं या नहीं। इस मामले में RJD सुप्रीमो की राउज एवेन्यू कोर्ट में वर्चुअल पेशी हुई। अदालत में मामले से जुड़ी दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई हुई। मामले में लालू यादव और अन्य पर जमीन के बदले नौकरी देने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। अब जानिए पूरा मामला क्या है? यह मामला लैंड फॉर जॉब स्कैम से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। CBI ने इसी आरोप को आधार बनाकर आपराधिक मामला दर्ज किया था। बाद में ED ने CBI की FIR को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED का आरोप है कि नौकरी पाने वाले कैंडिडेट्स के परिवारों से जमीन बहुत कम कीमत पर लालू यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कराई गई। एजेंसी के मुताबिक, इन जमीनों को अपराध से हुई आय यानी proceeds of crime के तौर पर देखा गया और बाद में इनके मालिकाना हक को अलग-अलग लेन-देन और कंपनियों के जरिए छिपाने की कोशिश की गई। ED ने किस तरह की मनी ट्रेल बताई? ED की जांच में लालू परिवार से जुड़ी AK Infosystems जैसी कंपनियों और जमीन के लेन-देन का भी जिक्र है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ जमीनों को ऐसी कंपनियों के माध्यम से रखा गया और बाद में कंपनी का नियंत्रण लालू परिवार के सदस्यों तक पहुंचा। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीन के कई सौदे वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम कीमत पर हुए। ED ने 2023 में इस मामले में छापेमारी के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए कैश और लगभग 1.25 करोड़ रुपए की कीमत के आभूषण और कीमती सामान जब्त किए थे। एजेंसी ने करीब 6.02 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां भी अटैच की थीं। इसके अलावा लालू परिवार के करीबी बताए गए कारोबारी अमित कात्याल को नवंबर 2023 में गिरफ्तार भी किया था। ED ने कब दाखिल की चार्जशीट? ED ने जनवरी 2024 में पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी। इसमें राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अमित कात्याल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद अगस्त 2024 में ED ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। कोर्ट ने सितंबर 2024 में इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया था। ED के मुताबिक, इस मामले में उन लोगों को भी आरोपी बनाया गया, जिन्होंने कथित तौर पर नौकरी के बदले अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों को नाममात्र की कीमत पर बेची थी। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने को लेकर अपना फैसला टाल दिया है। कोर्ट अब 30 सितंबर को यह तय करेगा कि लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत आरोप तय किए जाएं या नहीं। इस मामले में RJD सुप्रीमो की राउज एवेन्यू कोर्ट में वर्चुअल पेशी हुई। अदालत में मामले से जुड़ी दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई हुई। मामले में लालू यादव और अन्य पर जमीन के बदले नौकरी देने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। अब जानिए पूरा मामला क्या है? यह मामला लैंड फॉर जॉब स्कैम से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। CBI ने इसी आरोप को आधार बनाकर आपराधिक मामला दर्ज किया था। बाद में ED ने CBI की FIR को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED का आरोप है कि नौकरी पाने वाले कैंडिडेट्स के परिवारों से जमीन बहुत कम कीमत पर लालू यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कराई गई। एजेंसी के मुताबिक, इन जमीनों को अपराध से हुई आय यानी proceeds of crime के तौर पर देखा गया और बाद में इनके मालिकाना हक को अलग-अलग लेन-देन और कंपनियों के जरिए छिपाने की कोशिश की गई। ED ने किस तरह की मनी ट्रेल बताई? ED की जांच में लालू परिवार से जुड़ी AK Infosystems जैसी कंपनियों और जमीन के लेन-देन का भी जिक्र है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ जमीनों को ऐसी कंपनियों के माध्यम से रखा गया और बाद में कंपनी का नियंत्रण लालू परिवार के सदस्यों तक पहुंचा। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीन के कई सौदे वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम कीमत पर हुए। ED ने 2023 में इस मामले में छापेमारी के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए कैश और लगभग 1.25 करोड़ रुपए की कीमत के आभूषण और कीमती सामान जब्त किए थे। एजेंसी ने करीब 6.02 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां भी अटैच की थीं। इसके अलावा लालू परिवार के करीबी बताए गए कारोबारी अमित कात्याल को नवंबर 2023 में गिरफ्तार भी किया था। ED ने कब दाखिल की चार्जशीट? ED ने जनवरी 2024 में पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी। इसमें राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अमित कात्याल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद अगस्त 2024 में ED ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। कोर्ट ने सितंबर 2024 में इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया था। ED के मुताबिक, इस मामले में उन लोगों को भी आरोपी बनाया गया, जिन्होंने कथित तौर पर नौकरी के बदले अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों को नाममात्र की कीमत पर बेची थी।

