लापता होने के बाद भागलपुर में रुकी थी युवती:पटना आने के अगले दिन मिली लाश, 4 दिन पहले मिले थे 2 शव; एक की पहचान नहीं

लापता होने के बाद भागलपुर में रुकी थी युवती:पटना आने के अगले दिन मिली लाश, 4 दिन पहले मिले थे 2 शव; एक की पहचान नहीं

पटना में 9 अक्टूबर को युवती और युवक की लाश मिली थी। पुलिस को युवती की ट्रैवल हिस्ट्री के बारे में पता चला है, जबकि युवक की पहचान अबतक नहीं हुई है। थानेदार संजीव सिंह के अनुसार जांच में पता चला है कि 5 अक्टूबर को लापता होने के बाद युवती सबसे पहले दीघा पहुंची थी। इसके बाद वो भागलपुर गई और वहां करीब 2 दिन रुकी। 8 अक्टूबर को वो वापस पटना आई थी। अगले दिन 9 अक्टूबर को उसकी लाश कुम्हरार रेलवे ट्रैक पर मिली। गेमिंग ऐप पर सक्रिय थी युवती पुलिस के अनुसार युवती जिस सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रही थी, वह लापता होने के बाद पटना में बंद हुआ था। तकनीकी जांच के आधार पर लोकेशन और ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने बैंक से भी युवती के खाते की जानकारी मांगी है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि युवती एक गेमिंग ऐप पर सक्रिय थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
बैंक से खाते की डिटेल मांगी शुरुआत में परिजनों को लगा था कि युवती ने पिता के खाते से 80 हजार रुपए निकाले हैं। हालांकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने बैंक से खाते की डिटेल मांगी है और फिलहाल बैंक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। बैंक डिटेल्स मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खाते से कितनी राशि निकाली गई थी और पैसे किसने निकाले। परिजन का कहना है थाना की ओर से लापरवाही हुई है मनोज कुमार मृतका के चचेरे भाई ने बताया था कि, फॉर्म भरने के लिए घर से NIT आई थी। उसके बाद गुमशुदा हो गई। दोस्त यार से पता करने पर भी कुछ नहीं पता चला। परिजन थाने की लापरवाही इसमें मान रहे हैं। भाई का कहना है कि आखिरी 3 दिन लड़की कहां रही। इसका पता क्यों नहीं लगाया गया। भाई ने यह भी बताया कि ऑनलाइन काफी एक्टिव थी। गुमशुदा होने के बाद दुबई से भी एक कॉल आया था। जिसमें समाने वाले ने कहा कि दुबई से बोल रहा हूं। 10000 रुपए शैली लोन ली है। भेजिए नहीं तो लीगल एक्शन लिया जाएगा। पिता संजीव कुमार प्रजापति महावीर आरोग्य संस्थान में कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि बेटी की हत्या हुई है। मारकर रेलवे ट्रैक पर फेंका गया है। तीन बच्चों में बेटी सबसे बड़ी थी। थाने की लापरवाही है, जो मेरी बेटी को खोज नहीं पाई। पटना में 9 अक्टूबर को युवती और युवक की लाश मिली थी। पुलिस को युवती की ट्रैवल हिस्ट्री के बारे में पता चला है, जबकि युवक की पहचान अबतक नहीं हुई है। थानेदार संजीव सिंह के अनुसार जांच में पता चला है कि 5 अक्टूबर को लापता होने के बाद युवती सबसे पहले दीघा पहुंची थी। इसके बाद वो भागलपुर गई और वहां करीब 2 दिन रुकी। 8 अक्टूबर को वो वापस पटना आई थी। अगले दिन 9 अक्टूबर को उसकी लाश कुम्हरार रेलवे ट्रैक पर मिली। गेमिंग ऐप पर सक्रिय थी युवती पुलिस के अनुसार युवती जिस सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रही थी, वह लापता होने के बाद पटना में बंद हुआ था। तकनीकी जांच के आधार पर लोकेशन और ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने बैंक से भी युवती के खाते की जानकारी मांगी है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि युवती एक गेमिंग ऐप पर सक्रिय थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
बैंक से खाते की डिटेल मांगी शुरुआत में परिजनों को लगा था कि युवती ने पिता के खाते से 80 हजार रुपए निकाले हैं। हालांकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने बैंक से खाते की डिटेल मांगी है और फिलहाल बैंक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। बैंक डिटेल्स मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खाते से कितनी राशि निकाली गई थी और पैसे किसने निकाले। परिजन का कहना है थाना की ओर से लापरवाही हुई है मनोज कुमार मृतका के चचेरे भाई ने बताया था कि, फॉर्म भरने के लिए घर से NIT आई थी। उसके बाद गुमशुदा हो गई। दोस्त यार से पता करने पर भी कुछ नहीं पता चला। परिजन थाने की लापरवाही इसमें मान रहे हैं। भाई का कहना है कि आखिरी 3 दिन लड़की कहां रही। इसका पता क्यों नहीं लगाया गया। भाई ने यह भी बताया कि ऑनलाइन काफी एक्टिव थी। गुमशुदा होने के बाद दुबई से भी एक कॉल आया था। जिसमें समाने वाले ने कहा कि दुबई से बोल रहा हूं। 10000 रुपए शैली लोन ली है। भेजिए नहीं तो लीगल एक्शन लिया जाएगा। पिता संजीव कुमार प्रजापति महावीर आरोग्य संस्थान में कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि बेटी की हत्या हुई है। मारकर रेलवे ट्रैक पर फेंका गया है। तीन बच्चों में बेटी सबसे बड़ी थी। थाने की लापरवाही है, जो मेरी बेटी को खोज नहीं पाई।  

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