लखनऊ में बोरों में बिल्लियाँ पैक:लंगूर को भी बनाया गया बंधक, ‘आसरा-द हेल्पिंग हैंड्स’ ने किया रेस्क्यू, मामले में मुकदमा दर्ज करने कि मांग

लखनऊ में बोरों में बिल्लियाँ पैक:लंगूर को भी बनाया गया बंधक, ‘आसरा-द हेल्पिंग हैंड्स’ ने किया रेस्क्यू, मामले में मुकदमा दर्ज करने कि मांग

लखनऊ में शुक्रवार को महानगर स्थित शालीमार गैलेंट में पशु क्रूरता और वन्यजीव को बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि परिसर में कुछ बिल्लियों को बोरों में बंद कर बाहर फेंकने की तैयारी की जा रही थी, जबकि एक लंगूर को रस्सी से बांधकर रखा गया था। सूचना मिलने पर पशु संरक्षण संस्था ‘आसरा-द हेल्पिंग हैंड्स ट्रस्ट’ (AASRA) की टीम ने वन विभाग और डायल-112 पुलिस की मदद से मौके पर पहुंचकर बिल्लियों और लंगूर को रेस्क्यू कराया। संस्था की संचालक चारु खरे की ओर से महानगर थाने में लिखित शिकायत देकर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत के मुताबिक, बिल्लियों को जान से मारकर बाहर फेंकने के उद्देश्य से बोरों में बंद किया गया था। सूचना मिलने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर बोरों में बंद बिल्लियों को बाहर निकाला। साथ ही परिसर में रस्सी से बंधे लंगूर को भी मुक्त कराया गया। लंगूर को बंधक बनाने का आरोप संस्था द्वारा शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परिसर में लंगूर को शाहरुख नाम के व्यक्ति ने बंधक बनाकर रखा था। संस्था ने शालीमार गैलेंट के प्रेसिडेंट विकास टंडन और सेक्रेटरी सुमित गुप्ता की भूमिका की भी जांच की मांग की है। संस्था का कहना है कि इतने बड़े रिहायशी परिसर में वन्यजीव को किसकी जानकारी या अनुमति से रखा गया, इसकी जांच होनी चाहिए। CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग AASRA ने पुलिस से शालीमार गैलेंट परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कर कब्जे में लेने की मांग की है। संस्था का कहना है कि फुटेज मामले में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य साबित हो सकती है और समय बीतने पर इसके ओवरराइट होने की आशंका है। संस्था ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है।

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