लखनऊ के इंदिरानगर स्थित शक्तिनगर ढाल स्थित प्राणनाथ मंदिर में 30 दिनों तक सत्संग, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं का आयोजन चला । बीतक साहेब पारायण के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति और प्रेम के संदेश को समझा। रोजाना पाठ के साथ परमात्मा की पहचान, भक्ति और समर्पण पर चर्चा हुई। 3 अगस्त से शुरू हुए 30 दिवसीय पारायण का शुक्रवार को समापन हो गया । मंदिर परिसर में झंडारोहण के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आशीष अवस्थी ने बताया कि मंदिर में बीतक साहेब के माध्यम से एक पूर्ण परमात्मा की पहचान कराने का संदेश दिया जाता है। अनुयायियों के अनुसार, प्राणनाथ ने हिंदू धर्म के वेद, पुराण और शास्त्रों के साथ मुस्लिम धर्म के कुरान और हदीस समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं का एकीकरण किया। इन शिक्षाओं में सच्चिदानंद परमात्मा की पहचान, उनकी लीला और धाम का वर्णन कुलजम स्वरूप ग्रंथ में किया गया है। इसी आधार पर कथा और पारायण होता है। ‘साहेब आए इन जिमी, कारज करने तीन’ मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक प्राणनाथ का उद्देश्य धार्मिक और लौकिक विवादों को खत्म कर समाज में प्रेम और शांति का संदेश देना था। उनकी वाणी में कहा गया है- साहेब आए इन जिमी, कारज करने तीन। सो सब का झगड़ा मेट के, या दुनियां या दीन। अनुयायी इस वाणी को परमात्मा का वांगमय स्वरूप मानकर उसकी सेवा और पूजा करते हैं। पारायण के दौरान प्रेम-लक्षणा भक्ति को परमात्मा की प्राप्ति का प्रमुख साधन बताया गया। आशीष अवस्थी ने कहा कि भक्त परमात्मा को सखी भाव से राज जी, पिया जी, धनी जी और साहेब जी जैसे भावों कों याद करते हैं। भक्ति में प्रेम और समर्पण को विशेष महत्व दिया जाता है। वाणी में कहा गया है- अव्वल सब सोहागनी, एक ठौर पिया पास। सबों सुख होसी सोहागनी, रंग रस प्रेम विलास। मंदिर में हर रविवार सुबह 11 बजे धार्मिक सत्संग, भजन-कीर्तन और चर्चा गोष्ठी होती है। आयोजकों के अनुसार इसमें किसी भी धर्म के श्रद्धालु और धर्मप्रेमी शामिल होकर सत्संग का लाभ ले सकते हैं।

