सीधी जिले में ई-टीपी फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद रीवा और मऊगंज में भी खनिज कारोबारियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। खनिज विभाग ने जांच के दौरान मिली गड़बड़ियों के आधार पर शुक्रवार को क्रेशर, खदान और खनिज भंडारण केंद्र संचालकों को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। जांच में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, स्टॉक रजिस्टर मेंटेन नहीं करने, खनिज परिवहन के रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों के संधारण में कमियां सामने आई हैं। खनिज अधिकारी रवि पटेल के मुताबिक जिले में संचालित खनिज गतिविधियों के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। खनिज भंडारण अनुज्ञप्ति के तहत भंडारण में भी गड़बड़ी पाई गई। निरीक्षण में स्टॉक रजिस्टर, परिवहन से संबंधित अभिलेख और आवश्यक दस्तावेजों के संधारण में कमियां मिली हैं। इसके अलावा खनिज परिवहन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की स्थिति भी सामने आई है। स्वीकृत क्षेत्र से बाहर किया जा रहा खनन
विभागीय जांच में खदान संचालकों की ओर से भी नियमों की अनदेखी सामने आई है। खनन पट्टे की शर्तों के मुताबिक स्वीकृत क्षेत्र में ही खनन किया जाना चाहिए, लेकिन निरीक्षण में निर्धारित क्षेत्र से बाहर उत्खनन के मामले मिले। इसके अलावा पर्यावरणीय शर्तों और खनिज प्रबंधन योजना का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। निरीक्षण में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन, निर्धारित वृक्षारोपण नहीं करने, सुरक्षा के इंतजाम और खदानों में बाउंड्री पिलर की व्यवस्था नहीं करने जैसी कमियां मिली हैं। खनन कार्य से संबंधित जरूरी विवरण और निर्धारित समय पर प्रस्तुत किए जाने वाले अभिलेखों में भी अनियमितताएं पाई गई हैं। खनिज नियम 1996 के तहत होगी कार्रवाई
खनिज विभाग की ओर से जारी नोटिस में मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 30 (11), 17 (2), नियम 18 और नियम 50 (1) के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। संचालकों से सात दिन के भीतर सभी जरूरी दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद और भी खुल सकते हैं मामले
खनिज अधिकारी रवि पटेल के खुलासे के बाद जिले में खनिज कारोबार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वीकृत माइनिंग प्लान, पर्यावरणीय शर्तों और खनिज भंडारण के नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब विभाग की कार्रवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित संचालक अपने जवाब में क्या दस्तावेज पेश करते हैं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है। इन क्रेशर संचालकों को जारी किए गए नोटिस
खनिज विभाग द्वारा रीवा व मऊगंज में संचालित जिन क्रेशर संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें अस्मिता स्टोन क्रेशर, राम सिंह, आर मिनिरल्स, कपीश स्टोन, संजीव मिश्रा, अरुणेंद्र प्रसाद पयासी, पवन पाठक, राजेंद्र सिंह, रत्नेश द्विवेदी, संतोष कुमार तिवारी, नागेश्वर सिंह, विशाल शुक्ला, ओम स्टोन क्रेशर, राजेंद्र यादव, संकल्प स्टोन, तथागत स्टोन, राजमणि यादव, शिवेंद्र सिंह, ललित स्टोन, महाकालेश्वर, चक्रमणि शुक्ला, त्रिवेणी स्टोन, बिहारी लाल, शमशेर सिंह, अजय स्टोन, मेहमान केसिंग, सुशील कुमार तिवारी, शारदा प्रसाद पांडे, कल्पना तिवारी, हीरालाल यादव, संजय पाठक, देवेंद्र कुमार शुक्ला, प्रकाश चंद्र गोयल, उषा क्वालिटी, मोबीन खान और अनिल कुमार पटेल शामिल हैं। वहीं, मऊगंज में संचालित उदयपुर सप्लायर, आलोक तिवारी, आशुतोष मिश्रा, कृष्ण कुमार सिंह, विंध्यवासिनी स्टोन, महा मृत्युंजय एंटरप्राइजेज, रीवा मिनरल्स, स्काई लाइट, प्रकाश दीप मिनरल्स, रेनू सिंह, महामाया स्टोन, जय महाकाल माइंस, कामाख्या इंटरप्राइजेज, बालाजी माइंस और महालक्ष्मी सहित रीवा व मऊगंज में संचालित लगभग सभी क्रेशर संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।

