राज्यसभा में ‘केरलम’ नाम बदलने वाला विधेयक पास, नित्यानंद राय बोले- ‘केरलम’ नाम पूरे भारत के लिए गर्व की बात

राज्यसभा में ‘केरलम’ नाम बदलने वाला विधेयक पास, नित्यानंद राय बोले- ‘केरलम’ नाम पूरे भारत के लिए गर्व की बात

Kerala renamed to Keralam: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने बुधवार को राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ करने वाले ऐतिहासिक विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘केरल (नाम में परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को उच्च सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया था। यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है।

इस विधेयक के पास होने के साथ ही अब सभी संवैधानिक और प्रशासनिक दस्तावेजों, रिकॉर्डों और पत्राचार में राज्य का नाम औपचारिक रूप से ‘केरलम’ दर्ज किया जाएगा।

‘केरलम नाम पूरे भारत के लिए गर्व का विषय’

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि राज्य का नाम बदलना सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मामला है। ‘केरलम’ नाम न केवल इस राज्य के निवासियों के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। यह बदलाव राज्य की भाषा, परंपरा और ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

संवैधानिक प्रक्रिया हुई पूरी

केरल विधानसभा ने पूर्व में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए संसद में संशोधन विधेयक पेश किया। राज्यसभा की हरी झंडी मिलने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदल जाएगा।

JPC में 31 सदस्य होंगे

लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की ओर से रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक, विधेयक की जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया जाएगा। इसमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक संसद में पेश करेगी।

विपक्ष ने बिल वापस लेने की मांग की

विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि इस संशोधन के जरिए नागरिक समाज और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाया जा सकता है।

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