कमजोर मानसून के कारण राजस्थान के सामने 10 साल के सबसे बड़े अकाल का खतरा खड़ा हो गया है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार 11 जिले सूखे की चपेट में हैं। यहां सामान्य से 25% तक कम बारिश हुई है। इनमें 3 की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां सामान्य से 50% से भी कम बारिश हुई। आशंका है कि अगली गर्मियों में 2-3 जिलों में पानी की ट्रेन चलानी पड़ सकती है। बाजरा, मूंग, ग्वार जैसी फसलों को नुकसान हुआ है। अन्य राज्यों से खाद्य सामग्री आयात करनी पड़ेगी, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। चिंता यह है कि पड़ोसी राज्यों में भी हालत बेहतर नहीं है। पंजाब में सामान्य से 41%, हरियाणा में 23, गुजरात में 10 और एमपी में सामान्य से 4% कम बारिश हुई। 10 साल में इस बार सबसे ज्यादा जिलों में अकाल के हालात राजस्थान में 2015 के बाद अब 2026 में ज्यादा जिले सूखे से प्रभावित होने की आशंका बन गई है। 2015 में बारिश सामान्य से 9 फीसदी ज्यादा हुई थी, लेकिन छितराई हुई होने के कारण 19 जिलों की कई तहसीलों में सूखे के हालात बन गए थे। इस बार दोहरी मार है, बारिश भी छितराई हुई रही और सामान्य से करीब 19 फीसदी कम भी रही। पटवारियों की टीम राज्य से प्रभावित इलाकों में सर्वे में जुटी हुई है। सभी जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट (फसल खराबा और अकाल के हालात, जिन्हें सरकारी भाषा में अभावग्रस्त क्षेत्र कहा जाता है) कलक्टरों के जरिए राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग तक पहुंचेगी। फसल खराबे और सूखे के हालातों को लेकर 15 अक्टूबर के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी। फिलहाल सर्वे का अंतिम दौर चल रहा है। सरकार इस रिपोर्ट के बाद अभावग्रस्त (सूखा) जिलों और तहसीलों की सूची जारी करेगी। इसके बाद सूखा प्रभावित जिलों की संख्या कितनी है, ये स्थिति साफ हो जाएगी। संबंधित विभागीय सूत्रों ने बताया शुरुआती सर्वे से साफ है कि इस बार 11 से अधिक जिले सूखे की चपेट में आ रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत पाली, जैसलमेर और जालोर जिले में हैं। यहां की अधिकतर तहसीलें प्रभावित हैं और किसानों का काफी नुकसान हुआ है। तीनों जिलों में सामान्य से 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है। वहीं बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़, उदयपुर, राजसमंद, बालोतरा, भीलवाड़ा और जोधपुर में भी कई तहसीलों में कम बरसात के कारण अकाल के हालात बन गए हैं। पिछली बार 23 जिलों में 60 फीसदी से ज्यादा बारिश राजस्थान में पिछली बरसात के आंकड़ों से इस बार की बारिश की तुलना करें तो निराशा हाथ लगती है। पिछली बार 23 जिले ऐसे थे, जहां सामान्य से 60 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार पूरे मानसून में एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां बहुत ज्यादा बारिश हुई हो। वहीं पिछली बार केवल 1 जिला ऐसा था जहां सामान्य बारिश हुई थी, लेकिन इस बार 24 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य रही। पिछली बार एक भी जिला ऐसा नहीं था, जो बरसात की कमी से जूझा हो। लेकिन इस बार 14 जिले ऐसे हैं जो बरसात की कमी से जूझ रहे हैं। सामान्य माने जाने वाले 24 में से 18 जिले माइनस में प्रदेश में कम बारिश की मार राजधानी जयपुर पर भी पड़ी है। हालांकि मौसम विभाग ने यहां सामान्य बारिश मानी है। मौसम विभाग सामान्य से 19 फीसदी कम बारिश को नॉर्मल में गिनता है। ऐसे में राजस्थान के 24 जिले सामान्य बरिश वाले माने जा रहे हैं। यदि लिस्ट देखें तो इन 24 में से 18 जिलों में बरसात के आंकड़े माइनस में हैं। टोंक, जयपुर, चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में सामान्य से 17 फीसदी से भी कम बरसात हुई है। वहीं बारां और अजमेर में सामान्य से 15 फीसदी से भी कम बारिश दर्ज हुई है। केवल 6 जिलों में आंकड़े प्लस में दिखाई दे रहे हैं। इनमें से फलौदी व भरतपुर के ही आंकड़े दहाई को पार कर पाए हैं। केवल 3 जिलों में 24% से ज्यादा बरिश यहां 41 में से केवल 3 जिले हैं, जहां मानसून कुछ मेहरबान रहा। धौलपुर, डीग और सलूम्बर में 24 से 28 फीसदी तक अधिक बरसात हुई। पिछले सीजन की बात करें तो 17 जिलों में सामान्य से 20 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। जैसी आशंका जताई, वैसा ही रहा मानसून मौसम विभाग ने मानसून के पूर्वानुमान के तहत अल नीनो प्रभाव के कारण छितराई और कमजोर बरसात होने की आशंका जताई गई थी, जो सही साबित हो गई। मानसूनी बादल भी मैदानी इलाकों से खिसककर उत्तर में हिमालय की पहाड़ियों की ओर शिफ्ट हो गए। इस कारण मैदानी इलाकों में बरसात छितराई हुई रही। ओवरऑल देखें, तो आंकड़ा भले ही सामान्य से माइनस 17 एमएम कम बरसात होने का है, लेकिन छितराई बरसात के कारण कई इलाकों में बरसात नाम मात्र की हुई है। इससे ज्यादा नुकसान हुआ है। राजस्थान में मौसम विभाग निदेशक राधे श्याम शर्मा के अनुसार मानसून से पहले ही कम बारिश का पूर्वानुमान लगा लिया गया था। राजस्थान में वैसा ही कम बरसात का दौर देखने को मिला। दक्षिणी राजस्थान के अधिकतर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। शुरूआत से देखें तो जून-जुलाई के महीने में मानसून करीब-करीब सामान्य रहा। इसके बाद अगस्त और सितंबर में मानसूनी बारिश काफी कम रिपोर्ट हुई। इससे पहले देखें तो 2009 में सामान्य से कम बरसात हुई थी, तब केवल 249 एमएम बरसात हुई थी। ये सामान्य से करीब 43 फीसदी कम थी। कुछेक जिलों में पानी वाली रेल, सिंचाई के लिए किसान होंगे परेशान कम बरसात ने पीने के पानी और सिंचाई, दोनों की ही कमी कर दी है। पिछले साल मानसून के बाद राजस्थान के बांध जो 90.5 फीसदी भरे हुए थे। वे इस मानसून के बाद 62 फीसदी के आस-पास ही भर पाए हैं। इससे किसानों के लिए खेती को लेकर काफी चुनौतियां रहने वाली हैं। वहीं पेयजल प्रबंधन के लिए सरकार को अतिरिक्त बजट खर्च करना पड़ेगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने पाली सहित कुछेक जिलों में पानी की ट्रेन चलाए जाने की बात से इंकार नहीं किया है। इससे पहले पाली में 2022 में जोधपुर से पानी की ट्रेन भेजी गई थी। बांध भराव के मामले में सबसे बुरा हाल जोधपुर जोन का है। यहां बांधों में क्षमता के मुकाबले 16 फीसदी ही भराव रह गया है, जबकि जोधपुर जोन के बांध पिछले मानसून के बाद 80 फीसदी से ज्यादा भर गए थे। वहीं जयपुर, उदयपुर, कोटा और बांसवाड़ा सभी जोनों में बांधों की स्थिति पिछले मानसून की तुलना में काफी खराब है। केवल भरतपुर जोन के बांधों में पिछले मानसून के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा पानी आया है। महंगा होगा दाल-बाजरा और पशुओं का चारा राजस्थान में बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति बनने से बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इससे खाद्य सामग्री पर महंगाई की मार पड़ने की आशंका है। वहीं अगली गर्मियों में पशुओं के लिए चारा संकट खड़ा होने की भी आशंका है। चारा महंगा होगा तो दूध और इससे बनने वाले प्रोडक्ट पर भी महंगाई का साया पड़ सकता है। राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कैलाश शर्मा के अनुसार कम बरसात के कारण राजस्थान में अन्य राज्यों और क्षेत्रों से पशु आहार और आवश्यक खाद्य सामग्रियों को आयात करना होगा। सब्जियां भी महंगी होंगी। इससे आर्थिक बोझ कुछ बढ़ जाएगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों की आर्थिक स्थिति ज्यादा प्रभावित होगी। 1-1 करोड़ की राशि स्वीकृत करने का अधिकार राज्य सरकार को कई जिलों में राहत कार्य शुरू करने पड़ गए हैं। पीने के पानी के लिए टैंकर व्यवस्था को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। कम बारिश वाले जिलों में कलेक्टरों को 1-1 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करने का अधिकार दे दिया गया है। वहीं चारे की कमी से निपटने के लिए बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर सहित आस-पास के जिलों में नए चारा डिपो खोलने के आदेश भी दे दिए गए हैं। …. मौसम की ये खबर भी पढ़िए… अक्टूबर में भी पारा 40 डिग्री के ऊपर:रात के तापमान में तेजी से गिरावट; जानें- अगले एक हफ्ते कैसा रहेगा मौसम राजस्थान में अक्टूबर में भी दिन के समय तेज गर्मी है। पारा 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों में है। शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में दर्ज हुआ। पूरी खबर पढ़िए…

