(फाइल फोटो के साथ)
जयपुर, 28 अक्टूबर कांग्रेस की महिला शाखा की अध्यक्ष अलका लांबा ने राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करीब 41.85 लाख नामों के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होने पर बुधवार को सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से प्रत्येक पात्र मतदाता के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। लांबा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं छूटना चाहिए और किसी को भी मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
उन्होंने राजस्थान की जनता से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की ‘चलो दिल्ली- वोट चोर, गद्दी छोड़’ महारैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील भी की। लांबा ने राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 27 अक्टूबर 2025 को राजस्थान में 5,46,56,215 मतदाता दर्ज थे, जबकि 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 5,04,71,324 नाम शामिल थे, इस प्रकार प्रारूप सूची में 41,84,891 नाम शामिल नहीं थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि इन नामों में लगभग 8.75 लाख मृत मतदाताओं, 29.6 लाख स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं और करीब 3.44 लाख एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए थे।
लांबा ने कहा कि इन आंकड़ों की पारदर्शी जांच और पात्र मतदाताओं के नामों का सत्यापन जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का स्थानांतरित या अनुपस्थित पाया जाना अपने आप में उसके मतदाता बनने की पात्रता समाप्त नहीं करता, ऐसे नागरिकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सूची में नाम जुड़वाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में राजस्थान में 5,15,19,929 मतदाता दर्ज थे यानी प्रारंभिक संख्या की तुलना में अंतिम सूची में 31,36,286 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई।
लांबा के अनुसार, प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान 12,91,365 नए नाम जोड़े गए, जबकि 2,42,760 नाम हटाए गए। इस तरह इस अवधि में मतदाताओं की संख्या में 10,48,605 की वृद्धि हुई। कांग्रेस नेता ने मांग की कि निर्वाचन आयोग प्रत्येक जिले में नाम हटाने के कारणों, सत्यापन की स्थिति, शिकायतों के निस्तारण और दोबारा जोड़े गए पात्र मतदाताओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करे।
लांबा ने कहा कि महिलाओं, युवाओं, प्रवासी श्रमिकों और काम, शिक्षा या पारिवारिक कारणों से अपने मूल निवास स्थान पर उपलब्ध नहीं रहने वाले नागरिकों के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने पर उसे समय पर सूचना देने के साथ सुनवाई और अपील का अवसर भी मिलना चाहिए। लांबा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग भी दोहराई।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान होना चाहिए। उन्होंने महिला कांग्रेस की ओर से मतदाता जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं सहित सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम जांचने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही। लांबा ने कहा कि एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली महारैली मतदाता अधिकारों, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही के मुद्दों पर आवाज उठाने का अवसर है।

