राजभाषा पखवाड़े का समापन:10 अधिकारी और 75 रेलकर्मी सम्मानित, हास्य कवियों ने गुदगुदाया

राजभाषा पखवाड़े का समापन:10 अधिकारी और 75 रेलकर्मी सम्मानित, हास्य कवियों ने गुदगुदाया

हबीबगंज स्थित नर्मदा रेलवे क्लब ऑडिटोरियम में शनिवार को राजभाषा पखवाड़े का समापन हुआ। इस दौरान वर्षभर हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 अधिकारियों और 40 कर्मचारियों के साथ पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल रहे 35 रेलकर्मियों, यानी कुल 85 अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी ने विजेताओं को राजभाषा पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। डीआरएम पंकज त्यागी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध भाषाओं और बोलियों से है। सभी भाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं और इन्हें प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी है। हिंदी देश को एक सूत्र में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा के प्रति लगाव राष्ट्रप्रेम का भी एक रूप है। डिजिटल दौर में हिंदी का बढ़ा दायरा डीआरएम ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हिंदी का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। कंप्यूटर, इंटरनेट, रेलनेट, यात्री आरक्षण प्रणाली, ई-टिकट, मोबाइल टिकट बुकिंग, रेलवे वेबसाइट और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों ने हिंदी को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। हिंदी का महत्व केवल राजभाषा के तौर पर नहीं, बल्कि जनभाषा के रूप में भी है। कार्यक्रम में पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह का हिंदी दिवस संदेश अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं अपर मंडल रेल प्रबंधक प्रशासन अभिराम खरे ने पढ़कर सुनाया। कवियों ने हास्य-व्यंग्य से बांधा समां समापन समारोह में हास्य कवि सम्मेलन भी हुआ। भोपाल के कवि दीपक शुक्ला ‘दानादन’, झांसी के गीतकार अर्जुन सिंह चांद, जबलपुर की प्रियंका मिश्रा और कुलदीप ठाकुर ‘रंगीला’ ने हास्य, व्यंग्य और गीतों की प्रस्तुतियां दीं। कवियों की चुटीली रचनाओं पर रेलकर्मी और अधिकारी जमकर हंसे और तालियां बजाते रहे। कार्यक्रम में मंडल के सभी शाखा प्रमुख, यूनियन पदाधिकारी, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी शिवरमण शुक्ला ने किया। राजभाषा अधिकारी वृजेन्द्र कुमार ने आभार जताया। राजभाषा पखवाड़ा 14 से 26 सितंबर तक आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए रेलकर्मियों को हिंदी में अधिकाधिक काम करने, मौलिक लेखन और राजकीय कार्यों में हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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