राजगीर के रोमांच के दीवाने हुए सैलानी:नेचर सफारी में दो साल में दोगुने हुए पर्यटक, पूरे बिहार में ईको-टूरिज्म की डिमांड

राजगीर के रोमांच के दीवाने हुए सैलानी:नेचर सफारी में दो साल में दोगुने हुए पर्यटक, पूरे बिहार में ईको-टूरिज्म की डिमांड

ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन के लिए विश्व विख्यात नालंदा जिला अब पर्यावरण और रोमांचक पर्यटन (इको-टूरिज्म) का भी सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राजगीर की पंच पहाड़ियों और मनोरम वादियों के बीच स्थित ‘नेचर सफारी’ पर्यटकों को खूब लुभा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजगीर नेचर सफारी में आने वाले सैलानियों की संख्या में पिछले दो वर्षों के दौरान दोगुना उछाल दर्ज किया गया है। वर्ष 2022-23 में जहां 1.59 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर करीब तीन लाख के पार पहुंच गई है। ​प्रकृति और रोमांच का अनोखा संगम राजगीर नेचर सफारी में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ आधुनिक एडवेंचर स्पोर्ट्स का बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। यहां का सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण अत्याधुनिक ‘ग्लास स्काईवॉक’ है, जहां खड़े होकर गहरी खाई और हरियाली को निहारना पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव साबित हो रहा है। इसके अलावा हवा में तैरती जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और झूलता सस्पेंशन ब्रिज युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बच्चों और पारिवारिक पर्यटकों के लिए तीरंदाजी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग जैसी रोमांचक सुविधाएं भी मौजूद हैं, जो इसे पूरे परिवार के लिए एक संपूर्ण हॉलिडे डेस्टिनेशन बनाती हैं। ​बिहार भर में 36 फीसदी बढ़े इको-पर्यटक ​राजगीर की इस कामयाबी का सीधा असर पूरे सूबे के पर्यटन पर पड़ा है। बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्रों पर पिछले दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या में 36 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022-23 में पूरे राज्य में 55.20 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर 74.90 लाख हो गए। यानी महज दो साल के भीतर 20 लाख से अधिक नए पर्यटक राज्य के प्राकृतिक स्थलों से जुड़े हैं। राजगीर के साथ-साथ कैमूर के करमचट डैम में पर्यटकों की संख्या तीन गुना (46 हजार से बढ़कर 1.49 लाख) और मुंगेर के भीमबांध में ढाई गुना (35 हजार से 85 हजार) हो गई है। वहीं, बांका का मंदार हिल और जमुई की नागी-नकटी बर्ड सेंचुरी भी सैलानियों के पसंदीदा ठिकाने बन चुके हैं। ​पीपीपी मॉडल पर संवरेंगे 276 नए पर्यटन केंद्र ​राज्य सरकार अब इको-टूरिज्म के दायरे को और अधिक विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है। पर्यटन विभाग ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत 276 नई परियोजनाओं को चिन्हित किया है, जिनमें 29 बड़े जलाशय तथा 247 तालाब, झीलें और आर्द्रभूमियां शामिल हैं। इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए निजी निवेशकों को 30 साल की लीज पर दिया जाएगा। इससे राज्य में पर्यटन का बुनियादी ढांचा तो मजबूत होगा ही, साथ ही स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन के लिए विश्व विख्यात नालंदा जिला अब पर्यावरण और रोमांचक पर्यटन (इको-टूरिज्म) का भी सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राजगीर की पंच पहाड़ियों और मनोरम वादियों के बीच स्थित ‘नेचर सफारी’ पर्यटकों को खूब लुभा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजगीर नेचर सफारी में आने वाले सैलानियों की संख्या में पिछले दो वर्षों के दौरान दोगुना उछाल दर्ज किया गया है। वर्ष 2022-23 में जहां 1.59 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर करीब तीन लाख के पार पहुंच गई है। ​प्रकृति और रोमांच का अनोखा संगम राजगीर नेचर सफारी में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ आधुनिक एडवेंचर स्पोर्ट्स का बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। यहां का सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण अत्याधुनिक ‘ग्लास स्काईवॉक’ है, जहां खड़े होकर गहरी खाई और हरियाली को निहारना पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव साबित हो रहा है। इसके अलावा हवा में तैरती जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और झूलता सस्पेंशन ब्रिज युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बच्चों और पारिवारिक पर्यटकों के लिए तीरंदाजी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग जैसी रोमांचक सुविधाएं भी मौजूद हैं, जो इसे पूरे परिवार के लिए एक संपूर्ण हॉलिडे डेस्टिनेशन बनाती हैं। ​बिहार भर में 36 फीसदी बढ़े इको-पर्यटक ​राजगीर की इस कामयाबी का सीधा असर पूरे सूबे के पर्यटन पर पड़ा है। बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्रों पर पिछले दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या में 36 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022-23 में पूरे राज्य में 55.20 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर 74.90 लाख हो गए। यानी महज दो साल के भीतर 20 लाख से अधिक नए पर्यटक राज्य के प्राकृतिक स्थलों से जुड़े हैं। राजगीर के साथ-साथ कैमूर के करमचट डैम में पर्यटकों की संख्या तीन गुना (46 हजार से बढ़कर 1.49 लाख) और मुंगेर के भीमबांध में ढाई गुना (35 हजार से 85 हजार) हो गई है। वहीं, बांका का मंदार हिल और जमुई की नागी-नकटी बर्ड सेंचुरी भी सैलानियों के पसंदीदा ठिकाने बन चुके हैं। ​पीपीपी मॉडल पर संवरेंगे 276 नए पर्यटन केंद्र ​राज्य सरकार अब इको-टूरिज्म के दायरे को और अधिक विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है। पर्यटन विभाग ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत 276 नई परियोजनाओं को चिन्हित किया है, जिनमें 29 बड़े जलाशय तथा 247 तालाब, झीलें और आर्द्रभूमियां शामिल हैं। इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए निजी निवेशकों को 30 साल की लीज पर दिया जाएगा। इससे राज्य में पर्यटन का बुनियादी ढांचा तो मजबूत होगा ही, साथ ही स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

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